पुणे के FTII छात्रों का प्रदर्शन, SRFTI के छह छात्रों के रस्टिकेशन नोटिस वापस लेने की मांग
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फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII), पुणे के छात्रों ने मंगलवार को सत्यजित रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI), कोलकाता के छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन किया। यह देशभर में हो रहे प्रदर्शन का हिस्सा था। छात्रों का आरोप है कि कैंपस में राजनीतिक दखल बढ़ रहा है, छात्रों को डराया जा रहा है और असहमति की आवाज दबाने की कोशिश हो रही है।
यह प्रदर्शन SRFTI स्टूडेंट्स यूनियन के आह्वान पर हुआ। छात्र संगठनों का कहना है कि शिक्षा संस्थानों का 'भगवाकरण' बढ़ रहा है और RSS व संघ परिवार से जुड़े संगठन कैंपस के मामलों में दखल दे रहे हैं। FTII के छात्रों ने मंगलवार सुबह संस्थान के गेट पर गाने गाए और नारे लगाए।
FTII के छात्रों ने 27 सितंबर को SRFTI कैंपस में हुए टकराव के दौरान हिंसा के आरोपों पर और उसके बाद छह छात्रों पर हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई पर SRFTI के साथियों का साथ दिया। FTII के छात्रों की ओर से जारी बयान के मुताबिक, कैंपस में छात्रों की सहमति के बिना कथित तौर पर आयोजित एक कार्यक्रम को रोकने के लिए कहे जाने के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के सदस्यों ने 27 सितंबर को SRFTI के छात्रों पर कथित तौर पर हमला किया। मारपीट के आरोपों और टकराव के हालात की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
FTII के छात्रों ने इस कथित घटना की निंदा की। उनका कहना है कि कैंपस स्वतंत्र सोच, कलात्मक अभिव्यक्ति, लोकतांत्रिक भागीदारी और शांतिपूर्ण असहमति की जगह बने रहने चाहिए। बाहरी राजनीतिक संगठनों के कथित दखल को उन्होंने शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता के लिए गंभीर खतरा बताया।
प्रदर्शन के केंद्र में SRFTI प्रशासन की छह छात्रों पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई है। FTII के छात्रों ने रस्टिकेशन नोटिस तुरंत वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यह कार्रवाई जरूरत से ज्यादा है और छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश है। वे प्रशासन की तरफ से छात्रों को हॉस्टल और कैंपस से निकालने की कोशिशों के भी खिलाफ हैं। छात्रों का तर्क है कि जायज विरोध को हतोत्साहित करने के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई और कैंपस में रहने पर पाबंदी का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
FTII के एक छात्र ने कहा, "हमारी मांग है कि SRFTI के छह छात्रों का रस्टिकेशन रद्द किया जाए और वहां का प्रशासन 'सामान्य स्थिति बहाल करने' के नाम पर सभी छात्रों को कैंपस से बेरहमी से निकालने की कोशिशें बंद करे। हमारे इस समर्थन प्रदर्शन में बाहर से भी प्रदर्शनकारी छात्र और संगठन, हमारे साथी, शामिल हुए। छात्र एकता जिंदाबाद।"
FTII के छात्रों ने SRFTI के विवाद को देश के दूसरे शिक्षा संस्थानों के छात्र संगठनों की चिंताओं से भी जोड़ा। उनके बयान में जामिया मिलिया इस्लामिया, IIT बॉम्बे, आंबेडकर यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद, पांडिचेरी यूनिवर्सिटी और जादवपुर यूनिवर्सिटी के छात्रों के साथ एकजुटता जताई गई।
छात्रों का आरोप है कि कई कैंपस में इसी तरह राजनीतिक दखल, हिंसा या छात्रों की भागीदारी रोकने की कोशिशें देखी गई हैं। उनका कहना है कि SRFTI के मामले को संस्थानों की स्वायत्तता, अभिव्यक्ति की आजादी और छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की बड़ी बहस के दायरे में देखा जाना चाहिए।
छात्रों ने सिविल सोसायटी संगठनों, सांस्कृतिक समूहों और मीडिया से अपील की कि वे SRFTI स्टूडेंट्स यूनियन की उठाई चिंताओं को आगे बढ़ाएं। उनकी मुख्य मांगें हैं: छह रस्टिकेशन नोटिस की वापसी, कथित हॉस्टल खाली कराने की कार्रवाई पर रोक, 27 सितंबर की कथित हिंसा की जवाबदेही तय करना और कैंपस की स्वायत्तता की रक्षा।
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