सिंहगढ़ किले पर साइक्लिंग रेस से विवाद, पुरातत्व विभाग आयोजकों पर करेगा कार्रवाई
पुणे के ऐतिहासिक सिंहगढ़ किले पर रविवार को हुई डाउनहिल माउंटेन बाइकिंग प्रतियोगिता पर वन विभाग और राज्य पुरातत्व विभाग ने आपत्ति जताई है।
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पुणे, 27 अक्टूबर 2026: ऐतिहासिक सिंहगढ़ किले पर रविवार को हुई डाउनहिल माउंटेन बाइकिंग प्रतियोगिता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। वन विभाग का कहना है कि आयोजकों ने इजाज़त की शर्तें तोड़ीं, जबकि राज्य पुरातत्व विभाग ने बिना उसकी मंज़ूरी के कार्यक्रम कराने पर कार्रवाई शुरू करने का फैसला किया है।
यह प्रतियोगिता Zoravan ने आयोजित की थी और इसे रफ्तार, हिम्मत और सहनशक्ति की परीक्षा के तौर पर पेश किया गया था। इसमें नौ देशों के 28 राइडर शामिल हुए, जिनमें ब्राज़ील के डगलस और भारत के वीरेंद्र माली भी थे। सिक्किम और लद्दाख के आयोजनों के बाद यह प्रतियोगिता सिंहगढ़ पर रखी गई थी। बताए गए रूट में सिंह की गुफाएं, मारुति मंदिर और दूसरे हिस्से शामिल थे।
लेकिन रविवार सुबह, जब किले पर सैलानियों की भीड़ थी, साइकिल सवार किले के रास्तों और सीढ़ियों पर दौड़ते नज़र आए। इससे पर्यटकों और किला प्रेमियों में नाराज़गी फैल गई।
वन विभाग ने ZLS Downhill Mountain Biking Pune को 22 से 25 अक्टूबर तक सिंहगढ़ ट्रेल पर रेस कराने की इजाज़त दी थी। इसके साथ कई शर्तें थीं, जिनमें वन क्षेत्र और वन्यजीवों की हिफाज़त के इंतज़ाम भी शामिल थे। अधिकारियों के मुताबिक आयोजकों ने तय नियमों का उल्लंघन किया और यह भी नहीं बताया कि रेस किले के अंदर से शुरू होगी।
बताया गया है कि रेस पुणे दरवाज़े के अंदर की सीढ़ियों से शुरू हुई। इससे कुछ देर के लिए दरवाज़े तक जाने का रास्ता बंद हो गया। ट्रेक करके ऊपर आए सैलानी और गाड़ियों से पहुंचे लोग, दोनों को दिक्कत हुई। लोगों ने शिकायत की कि आयोजन खतरनाक ढंग से कराया गया।
कार्यकर्ताओं और किला प्रेमियों ने भी इस पर विरोध जताया है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐतिहासिक महत्व की जगह को कमर्शियल खेल आयोजनों के लिए क्यों इस्तेमाल किया जाए। उनका कहना है कि उन्हें खेल प्रतियोगिताओं से ऐतराज़ नहीं है, बल्कि ऐसी गतिविधियों से है जो किले की विरासत, पर्यटकों की सुरक्षा और स्थानीय हितों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
कार्यकर्ताओं ने कहा, "सिंहगढ़ सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं है, यह स्वराज्य के पराक्रम का प्रतीक है। इसकी पवित्रता को बचाना ही छत्रपति शिवाजी महाराज की सच्ची भक्ति है।" उन्होंने प्रशासन से अपील की कि ऐसी ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील जगहों पर इस तरह के आयोजनों की इजाज़त पर दोबारा सोचा जाए। उनका यह भी आरोप है कि आयोजकों ने वन विभाग की दी हुई इजाज़त का गलत इस्तेमाल करके प्रतियोगिता किले के अंदर तक पहुंचा दी।
वन परिक्षेत्र अधिकारी मनोज बारबोले ने कहा कि आयोजकों ने वन विभाग से इजाज़त ली थी, पर उन पर लगाई गई शर्तों का उल्लंघन किया। बारबोले ने कहा, "उन्होंने हमें नहीं बताया था कि रेस किले से शुरू होगी। ज़रूरत के हिसाब से आगे कार्रवाई करेंगे।"
राज्य पुरातत्व विभाग के सहायक निदेशक विलास वहाणे ने कहा कि आयोजकों ने कार्यक्रम से पहले विभाग की इजाज़त नहीं ली थी। वहाणे ने कहा, "सिंहगढ़ एक ऐतिहासिक स्मारक है और ऐसी कोई भी गतिविधि, जिससे इसके ढांचों को नुकसान पहुंच सकता है, ठीक नहीं है। हम वन विभाग की दी हुई इजाज़त का ब्योरा देखेंगे और ज़िम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करेंगे।"
इस मामले में आयोजकों से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क नहीं हो सका।
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