छुट्टी लेकर ओडिशा गया पुणे का ट्रैफिक सिपाही, तेलंगाना में 12 किलो गांजे के साथ धरा गया
पुणे शहर की ट्रैफिक शाखा के पुलिस कॉन्स्टेबल नितीन शिंदे को तेलंगाना में 12 किलो गांजे के साथ रंगे हाथ पकड़ा गया है। पुलिस आयुक्त ने उन्हें निलंबित कर दिया है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पुणे शहर पुलिस का एक सिपाही तेलंगाना में गांजे की तस्करी करते पकड़ा गया है। ट्रैफिक शाखा में तैनात नितीन ज्ञानू शिंदे के बैग से 12 किलो सूखा गांजा बरामद हुआ। शिंदे की उम्र 33 साल है और वह पुणे का ही रहने वाला है। एक पुलिसवाले का इस तरह नशे के कारोबार में पकड़ा जाना पूरे महकमे के लिए शर्मिंदगी की बात बन गया है।
शिंदे पिछले करीब डेढ़ साल से पुणे के विश्रामबाग ट्रैफिक विभाग में काम कर रहा था। वह अक्टूबर की शुरुआत से मेडिकल छुट्टी पर था। छुट्टी की तारीख को लेकर अलग-अलग बातें सामने आई हैं। कहीं 8 अक्टूबर बताई गई है, कहीं 7 अक्टूबर, और कुछ रिपोर्ट में 5 अक्टूबर का जिक्र है। यानी सही तारीख अभी पक्की नहीं है।
बताया जा रहा है कि बीमारी की इसी छुट्टी में शिंदे सीधे ओडिशा चला गया और वहां से गांजे की खेप खरीदी। उसे महाराष्ट्र लाने के लिए उसने रेल का सहारा लिया। रविवार 25 अक्टूबर को वह तेलंगाना के वारंगल जिले में नेक्कोंडा रेलवे स्टेशन के पास उतरा। उसकी हरकतें शक पैदा करने वाली थीं, इसलिए स्थानीय पुलिस ने उसे रोक लिया। बैग खोला गया तो अंदर 12 किलो गांजा निकला, जिसकी कीमत करीब 6 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस ने उसके तीन मोबाइल फोन भी जब्त किए।
पुलिस के मुताबिक शिंदे की योजना यह माल तेलंगाना होते हुए महाराष्ट्र, यानी पुणे लाकर अलग-अलग पेडलरों तक पहुंचाने की थी। इस मामले में नेक्कोंडा पुलिस थाने में नारकोटिक्स कानून (एनडीपीएस) के तहत केस दर्ज हुआ है। कुछ जगह थाने का नाम नेकुंडा लिखा गया है, पर मामला एक ही है।
रविवार को ही तेलंगाना पुलिस ने पुणे पुलिस को इसकी खबर दी, तब जाकर पुणे में यह बात खुली। खबर आते ही पुणे के पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने शिंदे को तुरंत निलंबित कर दिया और उसे नौकरी से निकालने की कार्रवाई भी शुरू कर दी। पुणे पुलिस की एक टीम यह भी पता कर रही है कि शिंदे के पुणे में किन लोगों से रिश्ते थे।
जांच अभी चल रही है। तीनों मोबाइल के कॉल रिकॉर्ड और व्हाट्सऐप चैट देखे जा रहे हैं, ताकि साफ हो कि ओडिशा में वह किससे जुड़ा था और महाराष्ट्र में माल किसे बेचना था। फिलहाल पक्के तौर पर यह नहीं कहा जा सकता कि शिंदे के साथ कोई और शामिल था या नहीं। वारंगल पुलिस इस पहलू को भी खंगाल रही है कि कहीं उसने पहले भी पुलिस का पहचान पत्र या वर्दी की आड़ लेकर ऐसी तस्करी तो नहीं की। साथ ही देखा जा रहा है कि इस अंतरराज्यीय रैकेट में पुणे पुलिस के या दूसरे राज्यों के किसी और का हाथ तो नहीं।
गिरफ्तारी के बाद शिंदे को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। तेलंगाना पुलिस उससे और पूछताछ करना चाहती है, इसलिए उसे दोबारा पुलिस हिरासत में लेने की अर्जी लगाए जाने की संभावना है।
इसी तरह का एक और मामला मीरा-भाईंदर से आया है। वहां नशीले पदार्थों की बिक्री के खिलाफ अभियान के दौरान पुलिस हवलदार प्रकाश पवार को एमडी ड्रग्स बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। उसके कथित साथी अखिलेश कुमार के साथ उसके पास से एमडी ड्रग्स, नकदी, एक दोपहिया गाड़ी और मोबाइल फोन जब्त हुए। इन सबकी कुल कीमत 1 लाख 32 हजार 550 रुपये बताई गई है।
वहां के पुलिस आयुक्त अनिकेत कौशिक ने मीरा-भाईंदर को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया था। ऐसे में जिन पर कार्रवाई की जिम्मेदारी है, उन्हीं में से एक के आरोपी बनने से इस मुहिम के असर पर सवाल उठने लगे हैं। मीरा-भाईंदर में नशे की बिक्री की समस्या पहले से गंभीर है, इसलिए वहां भी पुलिस महकमे में बेचैनी है।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।