पुणे विद्यापीठ का जोर कक्षा से बाहर की पढ़ाई, हुनर और समाज से जुड़ाव पर
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सावित्रीबाई फुले पुणे विद्यापीठ के आजीवन अध्ययन व विस्तार विभाग की बैठक और सेमिनार में प्रो-वाइस चांसलर डॉ. पराग काळकर ने नई शिक्षा नीति में विभाग की भूमिका पर बात की।
पुणे, 5 नवंबर 2026: सावित्रीबाई फुले पुणे विद्यापीठ (SPPU) के आजीवन अध्ययन व विस्तार विभाग (Department of Lifelong Learning and Extension) की नई शिक्षा नीति (NEP) को जमीन पर उतारने में बड़ी भूमिका है। प्रो-वाइस चांसलर डॉ. पराग काळकर ने कहा कि यह विभाग व्यावहारिक और हुनर पर आधारित पढ़ाई को बढ़ावा देता है और विद्यार्थियों को समाज से जोड़ता है।
डॉ. काळकर विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम समन्वयकों की बैठक और सेमिनार में बोल रहे थे। इसमें पुणे, अहमदनगर और नाशिक जिलों के संबद्ध कॉलेजों के कार्यक्रम समन्वयक शामिल हुए।
उद्घाटन सत्र में डॉ. काळकर मुख्य अतिथि थे। सत्र की अध्यक्षता आजीवन अध्ययन व विस्तार विभाग के निदेशक डॉ. विलास आढाव ने की। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यापीठ गीत से हुई, उसके बाद डॉ. आढाव ने प्रस्तावना रखी।
डॉ. आढाव ने कहा कि विभाग का मुख्य मकसद यह है कि विद्यापीठ में जो ज्ञान तैयार होता है, वह सिर्फ कक्षाओं तक सीमित न रहे बल्कि समाज के हर तबके तक पहुंचे। उन्होंने साल भर संबद्ध कॉलेजों के जरिए चलाई गई पहलों की जानकारी भी दी। इनमें स्वास्थ्य शिविर, सफाई अभियान, पर्यावरण जागरूकता अभियान, कौशल विकास की गतिविधियां और महिला सशक्तिकरण के कार्यक्रम शामिल थे। उन्होंने जोर दिया कि विद्यापीठ की पहल को जमीनी स्तर तक ले जाना जरूरी है और विद्यार्थियों को समाज के विकास में योगदान के लिए प्रेरित करना चाहिए।
समन्वयकों को संबोधित करते हुए डॉ. काळकर ने कहा कि ज्ञान का दायरा लगातार बढ़ रहा है, इसलिए अकेले कक्षा और किताबों की पढ़ाई अब काफी नहीं रह गई है। उनके मुताबिक नई पीढ़ी के लिए कक्षा की चार दीवारों से बाहर की शिक्षा दिन-ब-दिन ज्यादा अहम होती जा रही है।
उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति व्यावहारिक, हुनर पर आधारित और रोजगार से जुड़ी पढ़ाई पर जोर देती है, इसलिए विभाग की भूमिका खास तौर पर अहम हो जाती है। विद्यार्थियों को समाज से जोड़ने और उनमें सामाजिक जिम्मेदारी की भावना जगाने की विभाग की कोशिशों की उन्होंने तारीफ की।
इस सत्र में प्रा. डॉ. नवनाथ तुपे ने विभाग की गतिविधियों के बारे में बताया। शिक्षा व विस्तार विभाग की प्रमुख प्रा. डॉ. गीता शिंदे ने शिक्षा और समाज के रिश्ते पर अपने विचार रखे।
दूसरे सत्र में पुणे, अहमदनगर और नाशिक जिलों के कार्यक्रम समन्वयकों ने चालू शैक्षणिक वर्ष में अपने कॉलेजों में होने वाली गतिविधियों की योजना पेश की। प्रस्तावित पहलों, उन्हें लागू करने के तरीकों और समन्वयकों के सामने आने वाली दिक्कतों पर चर्चा हुई। इन दिक्कतों को कैसे दूर किया जाए, इस पर प्रतिभागियों ने आपस में सुझाव भी साझा किए।
सेमिनार के समन्वयक डॉ. पी. वी. गुप्ता ने प्रतिभागियों से बातचीत की और विभाग के व्यापक उद्देश्यों पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि समाज के हर व्यक्ति को आजीवन सीखने का मौका देना विभाग की सोच का केंद्र है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मीनल भोसले ने किया और प्रा. डॉ. संगीता साळवे ने आभार जताया। सेमिनार के आयोजन में विभाग के शिक्षकों और समन्वयकों ने भी योगदान दिया।
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