पुणे: छात्र आंदोलन के बाद SPPU नरम, कैंपस में धरने की अर्जियों पर जल्द फैसला
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सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी की मैनेजमेंट काउंसिल ने छात्रों की प्रदर्शन की अनुमति वाली अर्जियों पर तुरंत और सकारात्मक ढंग से विचार करने का फैसला किया है।
पुणे, 5 नवंबर 2026: सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी (SPPU) में प्रदर्शनों पर लगी पाबंदियों के खिलाफ अलग-अलग छात्र संगठनों ने आंदोलन किया था। अब इसका नतीजा सामने आया है। यूनिवर्सिटी की मैनेजमेंट काउंसिल ने तय किया है कि कैंपस में प्रदर्शन की इजाजत मांगने वाले छात्रों की अर्जियों पर जल्द विचार किया जाएगा।
यह फैसला बुधवार (4 नवंबर) को हुई मैनेजमेंट काउंसिल की बैठक में लिया गया। छात्र संगठनों की मांग थी कि पाबंदी लगाने वाला सर्कुलर वापस लिया जाए। इसी मांग के बाद यह बैठक हुई। यूनिवर्सिटी ने साफ किया है कि वह छात्रों की अभिव्यक्ति की आजादी को दबाना नहीं चाहती और इजाजत की अर्जियों पर सकारात्मक नजरिए से, बिना देरी के विचार किया जाएगा।
इससे पहले सोमवार (2 नवंबर) को कई छात्र संगठनों ने यूनिवर्सिटी कैंपस में धरना दिया था। वे इन पाबंदियों के खिलाफ थे। उनका आरोप था कि सर्कुलर में छात्रों के प्रदर्शन करने के हक पर गैरजरूरी शर्तें थोपी गई हैं और यह उनकी अभिव्यक्ति की आजादी को सीमित करने की कोशिश है।
प्रदर्शन करने वाले संगठनों का कहना था कि यूनिवर्सिटी कैंपस में प्रदर्शन करना छात्रों का संवैधानिक अधिकार है। कौन से मुद्दे उठाने हैं, कब और किस तरह प्रदर्शन करना है, यह तय करना भी छात्रों का ही हक है। उन्होंने यूनिवर्सिटी की मैनेजमेंट काउंसिल के छात्र प्रदर्शनों पर पाबंदी लगाने के अधिकार पर भी सवाल उठाए और मांग की कि सर्कुलर फौरन वापस लिया जाए।
बुधवार की बैठक में इस मुद्दे पर काफी देर तक चर्चा हुई। बैठक के बाद यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. प्रफुल्ल पवार ने प्रेस स्टेटमेंट जारी करके फैसले की जानकारी दी।
स्टेटमेंट के मुताबिक यूनिवर्सिटी प्रदर्शन की इजाजत मांगने वाले छात्रों की अर्जियों को जल्दी हाथ में लेगी और उन पर विचार करते वक्त सकारात्मक रुख अपनाएगी। साथ ही यूनिवर्सिटी ने जोर दिया है कि प्रदर्शनों से दूसरे छात्रों को परेशानी नहीं होनी चाहिए और सुरक्षा इंतजामों में भी रुकावट नहीं आनी चाहिए।
प्रशासन ने खास तौर पर निर्देश दिया है कि पूरे कैंपस में, खासकर मुख्य एंट्री गेट पर, सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे और इसमें छात्रों के लिए कोई अड़चन खड़ी न की जाए।
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