पुणे: सड़क सफाई योजना की समीक्षा, PMC ने मैपिंग की खामियां मानीं
पुणे महानगरपालिका परफॉर्मेंस पर आधारित सड़क सफाई के प्रयोग को आगे बढ़ाने पर फैसला करेगी। स्थायी समिति ने प्रशासन से 30 अक्टूबर तक स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।
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पुणे, 23 अक्टूबर 2026: पुणे महानगरपालिका (PMC) यह तय करने वाली है कि परफॉर्मेंस पर आधारित सड़क सफाई का प्रयोग आगे बढ़ाया जाए या नहीं। यह फैसला तीन महीने के कामकाज की रिपोर्ट देखने के बाद लिया जाएगा। इसके लिए स्थायी समिति ने प्रशासन से 30 अक्टूबर तक स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।
यह योजना महानगरपालिका के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट विभाग ने तीन महीने के ट्रायल के तौर पर शुरू की थी। इसमें ठेकेदारों को अपने-अपने इलाके की सफाई के लिए जवाबदेह बनाया गया था। औचक जांच के दौरान अगर ठेकेदार के तय किए गए हिस्से की सड़क पर कचरा या गंदगी मिलती, तो उस पर जुर्माना लग सकता था।
अब तक PMC ने अलग-अलग ठेकेदारों से करीब 6.5 लाख रुपये जुर्माने के तौर पर वसूले हैं। गंदगी मिलने की हर घटना पर प्रति कर्मचारी 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया।
योजना के तहत सफाई में लगे कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ाई गई। पहले करीब 4,500 कर्मचारी थे, अब यह संख्या 9,000 कर दी गई है। कर्मचारियों का बंटवारा 700-700 मीटर के तय हिस्सों के हिसाब से करने की योजना बनाई गई थी।
लेकिन इस कवायद में सफाई के जोन की मैपिंग की खामियां भी सामने आईं। सीमाएं तय करने से पहले प्रशासन सड़कों की सही नाप और वर्गीकरण नहीं कर पाया। नतीजा यह हुआ कि निजी हाउसिंग सोसाइटियों की अंदरूनी सड़कें भी सार्वजनिक सड़कों के साथ गिन ली गईं।
इन कमियों के बावजूद अधिकारियों ने एक बैठक में दावा किया कि इस पायलट योजना से शहर में सार्वजनिक सफाई बेहतर हुई है।
स्थायी समिति के अध्यक्ष श्रीनाथ भिमाले ने कहा, "प्रशासन से कहा गया है कि वह पिछले तीन महीने में योजना के कामकाज पर 30 अक्टूबर तक स्टेटस रिपोर्ट दे। स्थायी समिति रिपोर्ट देखेगी और उसके बाद तय करेगी कि योजना आगे बढ़ानी है या नहीं।"
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