पुणे में ISIA वर्कशॉप: भारत-स्वीडन ने क्लीन टेक्नोलॉजी पर साझेदारी बढ़ाई
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इंडिया-स्वीडन इनोवेशंस एक्सेलरेटर (ISIA) ने पुणे में अपनी 28वीं वर्कशॉप की, जिसमें उद्योग जगत और क्लीनटेक कंपनियों के प्रतिनिधि जुटे।
पुणे में 28 अक्टूबर 2026 को इंडिया-स्वीडन इनोवेशंस एक्सेलरेटर (ISIA) ने अपनी 28वीं वर्कशॉप आयोजित की। इसमें उद्योग जगत के दिग्गज, टेक्नोलॉजी देने वाली कंपनियां और सस्टेनेबिलिटी के जानकार एक जगह जुटे। मकसद था भारत में नई क्लीन टेक्नोलॉजी को उतारने के मौके तलाशना।
ISIA भारत और स्वीडन के बीच क्लीनटेक और ग्रीन एनर्जी में सहयोग को बढ़ावा देने वाली एक प्रमुख द्विपक्षीय पहल है। इसे स्वीडिश एनर्जी एजेंसी का समर्थन मिलता है और इसे बिज़नेस स्वीडन (द स्वीडिश ट्रेड एंड इन्वेस्ट काउंसिल) तथा कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री - ग्रीन बिज़नेस सेंटर (CII-GBC) के साथ मिलकर चलाया जाता है। इस कार्यक्रम के जरिए स्वीडन की क्लीनटेक कंपनियां भारतीय बाजार में आती हैं और भारतीय उद्योगों को आजमाई हुई टिकाऊ तकनीकें अपनाने का मौका मिलता है।
वर्कशॉप में 60 से ज्यादा भारतीय कंपनियों और 7 स्वीडिश क्लीनटेक कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कंपनियों ने एनर्जी स्टोरेज, रिसोर्स एफिशिएंसी, क्लीन एनर्जी, वॉटर मैनेजमेंट, IoT और डिजिटल सॉल्यूशंस, और ग्रीन प्रोपल्शन समेत क्लीन मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों के नए समाधान दिखाए।
शुरुआत से अब तक ISIA की उपलब्धियों में 80 से ज्यादा उन्नत क्लीन टेक्नोलॉजी को भारतीय बाजार में लाना शामिल है। इसने अलग-अलग क्षेत्रों में 250 से ज्यादा पायलट और कमर्शियल प्रोजेक्ट संभव बनाए, 50 से ज्यादा इंडस्ट्री पार्टनरशिप करवाईं और 1,500 से ज्यादा भारतीय हितधारकों से जुड़ाव किया।
अगले साल ISIA भारत-स्वीडन सहयोग के 15 साल पूरे करेगा। यह रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने, इनोवेशन को बढ़ावा देने और दोनों देशों के नेट-जीरो भविष्य की ओर बढ़ने में योगदान की लंबी प्रतिबद्धता को दिखाता है। आगे ISIA का लक्ष्य और ज्यादा साझेदारियां करवाना, ज्यादा स्वीडिश कंपनियों को भारत में स्थानीय स्तर पर जमाने में मदद करना और भारत के एनर्जी ट्रांजिशन पर बड़ा असर डालना है।
यह पड़ाव ऐसे समय आया है जब भारत और स्वीडन अपनी स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को गहरा कर रहे हैं, जिसके केंद्र में इनोवेशन, टेक्नोलॉजी, व्यापार और निवेश हैं। एनर्जी एक अहम मौके वाला क्षेत्र बना हुआ है, जहां स्वीडन की क्लीन-टेक्नोलॉजी की महारत भारत की महत्वाकांक्षा और पैमाने से जुड़ती है। ISIA के 15वें साल की ओर बढ़ने के साथ ध्यान इस मजबूत रिश्ते को नई कमर्शियल साझेदारियों, स्थानीय निवेश और भारत के एनर्जी ट्रांजिशन के व्यावहारिक समाधानों में बदलने पर रहेगा।
वर्कशॉप की शुरुआत इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (IGBC) पुणे चैप्टर की कोर कमेटी सदस्य और सस्टेन एंड सेव की डायरेक्टर प्रणति श्रॉफ मुनोट के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कारोबारी तौर-तरीकों में सस्टेनेबिलिटी को जोड़ने, रिसोर्स एफिशिएंसी और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार समाधानों को आगे बढ़ाने की अहमियत बताई। उन्होंने कहा कि सहयोग और नई तकनीकें टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने और उद्योगों व बिल्ट एनवायरनमेंट में ग्रीन तौर-तरीके तेजी से अपनाने में भूमिका निभाती हैं।
स्वीडिश एनर्जी एजेंसी के सीनियर बिज़नेस डेवलपर (इंटरनेशनल मार्केट डेवलपमेंट एंड इन्वेस्टमेंट) निल्स हेनॉक ने थीम एड्रेस दिया। उन्होंने ISIA और इंडस्ट्री ट्रांजिशन पार्टनरशिप (ITP) जैसे कार्यक्रमों के जरिए क्लीन टेक्नोलॉजी और टिकाऊ विकास में भारत-स्वीडन सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया। एनर्जी और पर्यावरण विकास के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने एनर्जी ट्रांजिशन में स्वीडन की अगुवाई वाली भूमिका और दोनों देशों के बीच लगातार सहयोग की जरूरत को रेखांकित किया।
बिज़नेस स्वीडन के ट्रेड कमिश्नर एरिक ओडार ने विशेष संबोधन में भारत-स्वीडन व्यापार और निवेश साझेदारी को मजबूत करने की बात कही, खासकर क्लीन टेक्नोलॉजी सहयोग पर। उन्होंने 2070 तक नेट जीरो पहुंचने की भारत की महत्वाकांक्षा और क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी प्रदाता के रूप में स्वीडन की ताकत को देखते हुए सहयोग की तात्कालिकता बताई। उन्होंने लंबी सोच रखने, स्थानीय स्तर पर निवेश करने और मजबूत स्थानीय साझेदारियां बनाने पर जोर दिया।
समापन भाषण में CII-ग्रीन बिज़नेस सेंटर के प्रिंसिपल काउंसलर दिनेश घई ने कहा कि सस्टेनेबिलिटी के लक्ष्यों को आजमाई हुई तकनीकों और मजबूत इंडस्ट्री साझेदारियों के जरिए ठोस नतीजों में बदलना जरूरी है। उन्होंने प्रतिभागियों से चर्चाओं को आगे बढ़ाने और क्लीन टेक्नोलॉजी अपनाने की रफ्तार बढ़ाने के लिए सार्थक सहयोग तलाशने की अपील की।
वर्कशॉप में C-Green, Drupps, ECAPS, Elonroad, Enclima Solutions, Holyvolt और PipeGuard ने तकनीकी प्रेजेंटेशन दिए, जिनमें भारत की औद्योगिक और एनर्जी ट्रांजिशन जरूरतों से मेल खाते स्वीडिश क्लीनटेक समाधान दिखाए गए। इसके बाद इंटरैक्टिव सत्र और चर्चाएं हुईं, जिनमें टेक्नोलॉजी अपनाने, कारोबारी साझेदारी और संयुक्त पहल के मौके टटोले गए।
कार्यक्रम का एक खास हिस्सा B2B मीटिंग्स थीं, जिनमें स्वीडिश टेक्नोलॉजी देने वालों और भारतीय उद्योग प्रतिनिधियों ने सीधे बात की और पायलट प्रोजेक्ट, कारोबारी साझेदारी और लंबे सहयोग की संभावनाएं देखीं। इसी डेलिगेशन वर्कशॉप में ECAPS और PipeGuard ने इंडिया-स्वीडन इनोवेशंस एक्सेलरेटर (ISIA) कार्यक्रम से ग्रेजुएशन भी किया, जो भारतीय बाजार में मौके तलाशने और मौजूदगी बनाने में उनकी प्रगति को मान्यता है।
ISIA का मंच स्वीडिश इनोवेशन को भारत के औद्योगिक तंत्र से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहा है और दोनों देशों की टिकाऊ विकास, इंडस्ट्रियल डीकार्बनाइजेशन और कम-कार्बन भविष्य की साझा प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
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