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महावितरण ने बैटरी में जमा 1,000 MWh बिजली दी, भारत में पहली बार का दावा

महावितरण ने बैटरी में जमा 1,000 MWh बिजली दी, भारत में पहली बार का दावा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कारोबार PT24 टीम

महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी ने शाम की पीक मांग के दौरान बैटरी स्टोरेज से 1,000 मेगावाट-घंटा बिजली की आपूर्ति की।

मुंबई, 29 अक्टूबर 2026: महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (MSEDCL) ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के जरिए 1,000 मेगावाट-घंटा (MWh) बिजली की आपूर्ति कर एक अहम पड़ाव पार किया है। राज्य में बिजली की खपत बढ़ रही है और बारिश भी कम हुई है। ऐसे में शाम की पीक मांग को पूरा करने में इससे मदद मिली।

यह बिजली मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0 के तहत बनी फालतू सौर ऊर्जा से आई है। इस योजना का मकसद खेती के पंपों को दिन में सौर बिजली देना है। MSEDCL के मुताबिक इस पहल से दिन में बनी फालतू सौर बिजली को स्टोर किया जा सकता है और शाम को जब मांग ज्यादा होती है, तब सप्लाई की जा सकती है।

मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव और MSEDCL के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर लोकेश चंद्रा ने कहा कि कंपनी भारत में पहली बन गई है, जिसने विकेंद्रीकृत वितरण नेटवर्क से जुड़े बैटरी स्टोरेज के जरिए इतने बड़े पैमाने पर बिजली दी है। उनके मुताबिक बिजली की बढ़ी मांग और राज्य के कुछ हिस्सों में सूखे जैसे हालात के बीच यह पहल खास तौर पर फायदेमंद है।

चंद्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0 महाराष्ट्र की बिजली व्यवस्था को बदलने में मदद कर रही है। इस योजना के तहत करीब 7,000 MW की विकेंद्रीकृत सौर क्षमता शुरू हो चुकी है, और यह बिजली मुख्य रूप से खेती के पंपों को दी जाती है।

बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) पहल के तहत MSEDCL ने 500 MW की बैटरी स्टोरेज क्षमता चालू कर दी है। ये सिस्टम दो घंटे तक बिजली दे सकते हैं, इसलिए यह 1,000 MWh की ऊर्जा भंडारण क्षमता बनती है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद लागू की गई इस पहल का मकसद अलग-अलग श्रेणियों के उपभोक्ताओं को फायदा पहुंचाना है।

अक्टूबर में अल नीनो से जुड़ी कम बारिश की वजह से गर्मी बढ़ी और बिजली की मांग भी बढ़ी। दिन में सौर बिजली अपेक्षाकृत सस्ती पड़ती है, लेकिन शाम को सौर उत्पादन घटने पर बिजली कंपनियों को अक्सर ऊंचे दाम पर बिजली खरीदनी पड़ती है। MSEDCL के बैटरी प्रोजेक्ट इसी कमी को भरने के लिए हैं। फालतू सौर बिजली को पीक मांग के वक्त के लिए जमा किया जाता है, ताकि बाजार से महंगी बिजली खरीदने पर निर्भरता घटे।

कंपनी ने कुल 750 MW क्षमता के बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट की योजना बनाई है, जो दो घंटे तक बिजली दे सकते हैं। इससे कुल 1,500 MWh की भंडारण क्षमता बनेगी। इसमें से 1,000 MWh के प्रोजेक्ट चालू हो चुके हैं, जबकि बाकी क्षमता दिसंबर 2026 के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है। MSEDCL के मुताबिक इसके अलावा 4,000 MWh की भंडारण क्षमता के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है।

MSEDCL का कहना है कि वह भारत की पहली बिजली वितरण कंपनी है, जिसने विकेंद्रीकृत वितरण नेटवर्क से जुड़ी 1,000 MWh की बैटरी स्टोरेज क्षमता लागू की है। चालू प्रोजेक्ट महाराष्ट्र में 50 जगहों पर लगे हैं, और हर जगह 10 MW क्षमता का बैटरी स्टोरेज सिस्टम है।

उम्मीद है कि इन प्रोजेक्ट से शाम के पीक घंटों में बिजली की सप्लाई ज्यादा भरोसेमंद होगी और बिजली बाजार के मौजूदा दामों से कम लागत पर मिलेगी। गर्मी के मौसम में, जब बिजली की मांग आम तौर पर बढ़ती है, यह पहल खास तौर पर काम आने की उम्मीद है। नवीकरणीय ऊर्जा को स्टोरेज ढांचे से जोड़ने की दिशा में यह एक कदम है। फालतू सौर बिजली जमा करके मांग के चरम पर देने से अक्षय ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल होगा और राज्य की बिजली जरूरतों को सहारा मिलेगा।

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