पुणे: आवारा मवेशियों के लिए PMC लगाएगी चारा केंद्र, जगह-जगह मिलेगा मुफ्त पानी
पुणे महानगरपालिका की स्थायी समिति ने गुरुवार, 5 नवंबर को प्रस्ताव मंजूर किया। पानी की किल्लत की संभावना के बीच बेसहारा जानवरों के खाने और पीने का इंतजाम होगा।
पुणे में बेघर घूमने वाले और छोड़ दिए गए मवेशियों को अब खाना और पानी देने के लिए शहर में अस्थायी ठिकाने बनेंगे। पुणे महानगरपालिका (PMC) की स्टैंडिंग कमेटी ने गुरुवार, 5 नवंबर को इससे जुड़े प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। कॉर्पोरेटर और कमेटी के सदस्य सुहास टिंगरे ने यह प्रस्ताव रखा था। इसका मकसद साफ है: शहर में पानी की तंगी हो, तब भी इन बेज़ुबान जानवरों की बुनियादी ज़रूरतें अटकें नहीं।
प्रस्ताव में कहा गया है कि जिन इलाकों में आवारा मवेशी सबसे ज़्यादा नज़र आते हैं, वहां अस्थायी चारा केंद्र खोले जाएंगे। साथ ही मुख्य चौराहों, खुली जगहों और उन ठिकानों पर, जहां ये जानवर अक्सर आते-जाते हैं, पानी के बर्तन और टंकियां रखी जाएंगी। जानवरों के लिए यह पानी बिल्कुल मुफ्त रहेगा।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब पुणे में जल्दी ही एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई शुरू होने की संभावना है। टिंगरे का कहना है कि जब लोगों को ही कम पानी मिलेगा, तो आवारा मवेशियों को पीने का पानी मिलना और मुश्किल हो सकता है। ऐसे में वे पानी ढूंढते हुए इधर-उधर भटकने पर मजबूर हो जाएंगे।
इस मामले की एक पुरानी कड़ी भी है। PMC की हद में 32 गांव जुड़ने के बाद टिंगरे ने छोड़े गए और आवारा मवेशियों की ठीक से देखभाल के लिए पक्की गौशालाएं बनाने की बात रखी थी, जिनमें पूरी सुविधाएं हों। PMC की जनरल बॉडी यानी सर्वसाधारण सभा उस प्रस्ताव को पहले ही हरी झंडी दे चुकी है। मगर इन गौशालाओं को तैयार होने में काफी वक्त लगेगा। इसी वजह से टिंगरे ने ज़ोर दिया कि जब तक वे नहीं बन जातीं, तब तक जानवरों के दाने-पानी का अस्थायी बंदोबस्त होना ही चाहिए।
टिंगरे की मांग है कि चारा केंद्र और पानी के ठिकाने उसी दिन से चालू हो जाएं, जिस दिन से एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई लागू होती है। इस काम में गौशाला चलाने वाली संस्थाओं, गौरक्षा से जुड़े संगठनों और पशु कल्याण पर काम करने वाले NGO को भी साथ लिया जाएगा।
प्रस्ताव यह भी कहता है कि इन इंतज़ामों को ठीक से ज़मीन पर उतारने के लिए ज़रूरी जगह, मैनपावर और पैसा PMC खुद मुहैया कराए।
कुल मिलाकर योजना के तीन हिस्से हैं: आवारा मवेशियों वाले इलाकों में अस्थायी चारा केंद्र, चौराहों और खुली जगहों पर मुफ्त पानी की टंकियां, और पक्की गौशालाएं बनने तक चलने वाला यह बीच का इंतज़ाम।
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