पुणे को 30 जून 2027 तक सिर्फ 7 TMC पानी, दिवाली के बाद एक दिन छोड़कर सप्लाई के आसार
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कैनाल एडवाइजरी कमेटी ने कथित तौर पर शहर का हिस्सा 7 TMC तक सीमित किया है, जबकि खड़कवासला बांध सिस्टम में अंदाजन 24 TMC पानी है।
कैनाल एडवाइजरी कमेटी ने कथित तौर पर तय किया है कि 30 जून 2027 तक पुणे शहर को सिर्फ 7 TMC पानी मिलेगा। अगर ऐसा हुआ तो शहर में पानी की सप्लाई का शेड्यूल और सख्त हो सकता है।
हैरानी की बात यह है कि खड़कवासला बांध सिस्टम में अंदाजन 24 TMC पानी उपलब्ध है। इसके बावजूद शहर के हिस्से में इतना कम पानी आने की बात सामने आई है, इसलिए लोगों में चिंता है कि आने वाले महीनों में शहर तक आखिर कितना पानी पहुंचेगा।
प्रस्तावित हिस्से का असर 65 लाख से ज्यादा लोगों पर पड़ सकता है। इससे पुणे महानगरपालिका (PMC) पर भी अतिरिक्त दबाव आएगा, जो पहले से ही दिवाली के बाद एक दिन छोड़कर पानी देने पर विचार कर रही है।
बताई जा रही बंटवारे की योजना के मुताबिक उपलब्ध पानी में से करीब 17 TMC दूसरी जरूरतों के लिए रखा जा सकता है। इनमें खेती का इस्तेमाल, निचले इलाकों में पीने के पानी की जरूरत, भाप बनकर उड़ने वाला पानी और पानी बांटने के दौरान होने वाला नुकसान शामिल है। इस हिसाब से मौजूदा जल वर्ष के आखिर तक शहर की जरूरत पूरी करने के लिए पुणे के पास काफी छोटा हिस्सा बचेगा।
PMC के सामने सबसे पहली चुनौती यह होगी कि मिलने वाले 7 TMC पानी को पूरे शहर में कैसे बांटा जाए और घरों की बुनियादी सप्लाई भी बनी रहे। हो सकता है कि प्रशासन दिवाली के बाद रोटेशन सिस्टम लागू करे, जिसमें शहर के अलग-अलग हिस्सों को एक दिन छोड़कर पानी मिले।
ऐसा हुआ तो रिहायशी इलाकों में लोगों की रोजमर्रा की दिनचर्या पर असर पड़ सकता है, खासकर तब, जब शहर गर्मियों के महीनों की तरफ बढ़ रहा है। PMC को पानी की खपत का पैटर्न देखना होगा और मौजूद स्टॉक को ज्यादा से ज्यादा खींचने के लिए बंटवारे की योजना ध्यान से बनानी होगी।
इस फैसले के बाद इलाके के पानी की योजना वाली बैठकों में शहर की नुमाइंदगी पर भी सवाल उठ रहे हैं। खबरों के मुताबिक कुछ मंत्री और विधायक, जो पुणे की जरूरतें रख सकते थे, कैनाल कमेटी की बैठक में मौजूद नहीं थे। जो लोग बैठक में पहुंचे, उनसे भी प्रस्तावित हिस्से पर उनके जवाब को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं।
पानी की उपलब्धता पुणे के लिए सिर्फ घरों की चिंता नहीं है। महानगरपालिका के बजट में कई बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट हैं, जिनमें हाई कैपेसिटी मास ट्रांजिट रूट (HCMTR) और फ्लाईओवर के काम भी शामिल हैं। पानी की सप्लाई सीमित होने की आशंका से शहर की नागरिक प्राथमिकताओं और लंबे दौर के विकास पर होने वाली चर्चा में एक और पहलू जुड़ गया है।
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