पुणे के मशहूर हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. शिरीष हिरेमठ का 75 साल की उम्र में निधन
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कार्डिऑलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष डॉ. शिरीष हिरेमठ ने गुरुवार रात सोपान बाग के अपने घर में आखिरी सांस ली।
पुणे के जाने-माने सीनियर हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. शिरीष (एम. एस.) हिरेमठ अब नहीं रहे। वे 75 साल के थे। गुरुवार रात करीब नौ बजे सोपान बाग में अपने घर पर उनका निधन हो गया। वे कार्डिऑलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष थे और पुणे में उनका नाम बड़े सम्मान से लिया जाता था।
जानकारी के मुताबिक, पिछले कुछ सालों से उनकी तबीयत ठीक नहीं रहती थी और वे बीमारी से जूझ रहे थे। उनके जाने से इंटरव्हेन्शनल कार्डिऑलॉजी के क्षेत्र में एक बेहद अनुभवी और माहिर डॉक्टर की कमी महसूस की जा रही है, ऐसी भावना लोग जता रहे हैं।
डॉ. हिरेमठ ने बी. जे. मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और एमडी किया था। इसके बाद उन्होंने वहीं से कार्डिऑलॉजी में डीएम की डिग्री भी हासिल की। साल 1982 में पुणे के जोशी हॉस्पिटल से उनका मेडिकल सफर शुरू हुआ। आगे चलकर उन्होंने रुबी हॉल क्लिनिक समेत शहर के कई नामी अस्पतालों में सेवाएं दीं।
रुबी हॉल क्लिनिक में वे लंबे वक्त तक कार्डियाक कैथलैब के संचालक रहे और यह अहम जिम्मेदारी उन्होंने बखूबी निभाई। रुबी हॉल क्लिनिक के पूर्व संचालक के तौर पर भी उन्हें जाना जाता है। अपने करीब चार दशक के करियर में उन्होंने 40 हजार से ज्यादा अँजिओप्लास्टी और एक लाख से ज्यादा अँजिओग्राफी की थीं। पुणे में शुरुआती दौर की कामयाब अँजिओप्लास्टी करने वाले अग्रणी डॉक्टरों में उनका नाम गिना जाता है।
डॉ. हिरेमठ सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं रहे। हृदयरोग की रोकथाम, वक्त पर जांच और सही इलाज के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए भी उन्होंने काफी कोशिशें कीं। जिन मरीजों को हार्ट अटैक आता है, उनका फौरन और आधुनिक तरीके से इलाज करने के लिए 'फार्माको-इन्व्हेसिव अप्रोच' (Pharmaco-invasive approach) को भारत में लोकप्रिय बनाने में उनका बड़ा योगदान माना जाता है।
उनके निधन से मेडिकल जगत में और उन तमाम युवा डॉक्टरों में गहरा शोक है, जो उनके मार्गदर्शन में तैयार हुए।
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