नाशिक की साक्षी चांडक सीए इंटर में देश भर में अव्वल, 600 में से 502 अंक
नाशिक की साक्षी चांडक ने सीए इंटरमीडिएट परीक्षा में 600 में से 502 अंक लेकर ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल की है।
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चार्टर्ड अकाउंटेंसी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में गिना जाता है। इसे पास करने के लिए दिन-रात मेहनत करनी पड़ती है। लेकिन सही रणनीति, घरवालों का साथ और आज की टेक्नोलॉजी का ठीक इस्तेमाल हो, तो इस परीक्षा में रैंक 1 भी आ सकती है। महाराष्ट्र के नाशिक की रहने वाली साक्षी चांडक ने यही कर दिखाया है।
साक्षी ने सीए इंटरमीडिएट परीक्षा में 600 में से 502 अंक यानी 83.67 प्रतिशत हासिल किए हैं। उनकी ऑल इंडिया रैंक 1 आई है। वे सीए इंटरमीडिएट सितंबर 2026 की टॉपर हैं। खास बात यह है कि उन्होंने पुणे विश्वविद्यालय से बीकॉम करते करते यह मुकाम पाया है।
साक्षी की कामयाबी सिर्फ किताबों में सिर गड़ाए रखने की कहानी नहीं है। यह स्मार्ट स्टडी और नए जमाने की टेक्नोलॉजी अपनाने की भी मिसाल है। स्कूल के दिनों से ही पढ़ाई में तेज रही साक्षी अपनी इस सफलता का श्रेय अपने मम्मी-पापा और कड़ी मेहनत को देती हैं। उनका दिन सुबह 5 बजे शुरू होता था। केस स्टडीज समझने के लिए वे एआई का समझदारी से इस्तेमाल करती थीं।
साक्षी के मुताबिक उनकी सबसे बड़ी ताकत "सातत्य" यानी लगातार बने रहना थी। उन्होंने जुलाई 2025 में सीए इंटर की पढ़ाई शुरू की थी। वे रोज सुबह 5 बजे उठती थीं और रात 10:30 बजे सो जाती थीं। नाश्ता, लंच और डिनर जैसे छोटे-छोटे ब्रेक के साथ वे औसतन 12 घंटे पढ़ती थीं। परीक्षा के आखिरी दिनों में यह पढ़ाई बढ़कर 14 घंटे तक पहुंच गई थी। साक्षी का मानना है कि कितने घंटे पढ़ा, इससे ज्यादा जरूरी यह है कि उस दौरान कितने ध्यान से पढ़ा।
डिजिटल जमाने में साक्षी ने एआई टूल्स से दोस्ती कर ली। ऑडिट और लॉ जैसे विषयों में मुश्किल कॉन्सेप्ट को गहराई से समझने के लिए और पेचीदा केस लॉज को आसान भाषा में खोलने के लिए वे इन टूल्स की मदद लेती थीं। सीए की तैयारी करने वाले बच्चे अक्सर थ्योरी और कानूनी शब्दों में उलझ जाते हैं। ऐसे में साक्षी ने चैटजीपीटी जैसे एआई टूल्स से केस लॉ को रोजमर्रा के आसान उदाहरणों के जरिए समझा।
हर विषय की अपनी मांग होती है और साक्षी ने उसी हिसाब से तैयारी की। टैक्स के लिए उन्होंने शुरू से ही खूब प्रैक्टिकल सवाल हल किए। स्ट्रैटेजिक मैनेजमेंट (SM) जैसे रटने वाले विषय को उन्होंने बार-बार दोहराया। सबसे अहम बात यह कि ऑडिट जैसे कठिन और थ्योरी वाले विषय की उन्होंने 4 बार रिवीजन की। इसी वजह से परीक्षा के दिन तक पूरे सिलेबस पर उनकी पकड़ मजबूत हो चुकी थी।
पढ़ाई की छुट्टियों के दौरान परीक्षा का तनाव होना और अपनी तैयारी पर शक होना बिल्कुल आम बात है। साक्षी के साथ भी ऐसा हुआ। पर इस मुश्किल मोड़ पर अपनी मेहनत पर भरोसा, मम्मी-पापा की बातें और टीचरों का मार्गदर्शन उनके काम आया। घर से मिले तनाव-मुक्त माहौल ने साक्षी को मानसिक और भावनात्मक तौर पर मजबूत बनाए रखा।
साक्षी की कहानी से यह साबित होता है कि सही मार्गदर्शन, लगन और नई टेक्नोलॉजी के तालमेल से बहुत मुश्किल लक्ष्य भी पाया जा सकता है। सीए की तैयारी कर रहे बच्चों के लिए उनका 12 घंटे का अनुशासन और स्मार्ट सोच रास्ता आसान कर सकती है।
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