आधार ऑथेंटिकेशन के बिना अब नहीं होगी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री, पुणे में नया नियम लागू
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राज्य के रजिस्ट्रेशन और स्टैम्प विभाग ने प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन से जुड़े हर शख्स के लिए आधार ऑथेंटिकेशन जरूरी कर दिया है। अब गवाह या पहचानकर्ता का विकल्प भी खत्म है।
प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कराने जा रहे लोगों के लिए नियम बदल गया है। राज्य के रजिस्ट्रेशन और स्टैम्प विभाग ने प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन से जुड़े हर व्यक्ति के लिए आधार आधारित ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर दिया है। यह नियम बुधवार, 4 नवंबर से लागू हो गया है। अब लोग UIDAI के आधिकारिक मोबाइल ऐप पर फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए भी अपनी पहचान की पुष्टि कर सकते हैं।
यह नई सुविधा विभाग के iSARITA 1.9 सिस्टम में जोड़ी गई है और इसका नाम Online Verification Seeking Entity (OVSE) है। रजिस्ट्रेशन अधिकारियों के मुताबिक यह पहले से चल रहे फिंगरप्रिंट और आइरिस स्कैन के तरीकों के साथ-साथ काम करेगी।
संशोधित प्रक्रिया में एक पुरानी छूट खत्म कर दी गई है। पहले अगर किसी व्यक्ति का आधार ऑथेंटिकेशन फेल हो जाता था, तो कोई गवाह या पहचानकर्ता उसकी पहचान की तस्दीक कर सकता था। यह विकल्प अब बंद है। प्रॉपर्टी लेनदेन के हर पक्ष को आधार ऑथेंटिकेशन कामयाबी से पूरा करना होगा, तभी रजिस्ट्रेशन आगे बढ़ेगा।
सब-रजिस्ट्रार दफ्तरों (SRO) में देरी से बचने के लिए नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे पहले से आधार ऐप डाउनलोड कर लें। दफ्तर जाने से पहले ही शुरुआती रजिस्ट्रेशन, SIM वेरिफिकेशन और फेस ऑथेंटिकेशन पूरा कर लें। ऐप के लिए Android 9.0 या उससे ऊपर का वर्जन, या iOS 16 या उससे ऊपर का वर्जन चाहिए। साथ में चालू इंटरनेट कनेक्शन और काम करने वाला कैमरा भी जरूरी है।
रजिस्ट्रेशन के वक्त दफ्तर के कंप्यूटर पर एक QR कोड दिखेगा। व्यक्ति को उसे आधार ऐप से स्कैन करना होगा, सहमति देनी होगी और फेस चेक पूरा करना होगा। नतीजा उसी वक्त दफ्तर के कंप्यूटर पर दिख जाता है। ऑथेंटिकेशन पास होने पर रजिस्ट्रेशन आगे चलता रहता है।
रजिस्ट्रेशन के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल अभय मोहिते ने कहा कि वेरिफिकेशन के दौरान आधार धारकों को दफ्तर में खुद मौजूद रहना होगा। उन्हें अपना रजिस्टर्ड मोबाइल फोन साथ लाना होगा और छह अंकों के PIN से ऐप में लॉग इन कर पाना होगा। जिन लोगों ने अपना आधार बायोमेट्रिक लॉक कर रखा है, उन्हें ऐप के जरिए उसे अनलॉक भी करना पड़ेगा।
विभाग ने रजिस्ट्रेशन अधिकारियों से कहा है कि वे नागरिकों को ऑथेंटिकेशन की प्रक्रिया, डेटा शेयरिंग और सहमति की शर्तें समझाएं। लोग नए सिस्टम से वाकिफ हो सकें, इसके लिए विभाग अपने सोशल मीडिया पेजों पर एक विस्तृत वीडियो ट्यूटोरियल भी शेयर कर रहा है।
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