गुरूवार, 5 नवंबर 2026

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38 साल के विराट कोहली ने बदल दी भारतीय क्रिकेटरों की फिटनेस, खुराक और रिकवरी की आदतें

38 साल के विराट कोहली ने बदल दी भारतीय क्रिकेटरों की फिटनेस, खुराक और रिकवरी की आदतें तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
खेल PT24 टीम

विराट कोहली आज 38 के हो गए। रनों से आगे, उनकी सबसे बड़ी देन टीम इंडिया की फिटनेस संस्कृति मानी जा रही है।

विराट कोहली आज 38 साल के हो गए। फैंस और पुराने साथी खिलाड़ी उन्हें बधाई दे रहे हैं और उनकी सबसे बेहतरीन पारी कौन सी थी, इस पर बहस भी फिर शुरू हो गई है। लेकिन एक एक्टिव इंटरनेशनल क्रिकेटर के तौर पर एक और जन्मदिन मनाते कोहली की जो देन उनके रनों से भी ज्यादा टिकने वाली है, वो स्कोरकार्ड में कहीं दिखती ही नहीं। उन्होंने भारतीय क्रिकेटरों के अपने शरीर को तैयार करने का तरीका बदला और फिर पूरी टीम को उसी रास्ते पर चलाया।

भारत के पूर्व ओपनर वीरेंद्र सहवाग ने इसी साल कहा था कि कोहली भारतीय क्रिकेट में फिटनेस कल्चर लेकर आए। सहवाग ने उन्हें इस दौर का सबसे फिट क्रिकेटर बताया।

कुछ साल पहले तक फिटनेस ही वो मोर्चा था जहां भारतीय क्रिकेट पिछड़ता था। पूर्व कोच रवि शास्त्री ने कहा है कि इस मामले में भारत ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और इंग्लैंड से काफी पीछे था। कोहली का अपना सफर भी यहीं से शुरू हुआ। शुरुआती दिनों में वो टैलेंटेड तो थे, पर थोड़े मोटे थे। 2012 के ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद उन्होंने फिटनेस को गंभीरता से लेने का फैसला किया।

असली बदलाव तब आया जब उन्होंने ट्रेनर शंकर बसु के साथ काम शुरू किया। बताया गया है कि दोनों की बात 2014 में हुई और अगले सीजन से साथ काम शुरू हुआ। दोनों ने ट्रैक एंड फील्ड से आइडिया लिए और स्पीड और पावर पर टिका एक सटीक वेट प्रोग्राम बनाया। बसु का कहना है कि कोहली पहले क्रिकेटर थे जिन्होंने किसी ओलंपिक एथलीट की तरह ट्रेनिंग की। 2016 के आईपीएल में कोहली हर मैच की सुबह वेट उठाने लगे, ताकि खेल से पहले मसल्स जाग जाएं। बसु ने यह भी कहा है कि फिट दिखना एक बात है और एथलेटिक तौर पर फिट होना दूसरी बात।

खाने की प्लेट में भी बड़ा बदलाव आया। कोहली पहले वेट और खूब रेड मीट पर निर्भर थे। उनका कहना है कि इससे एक दमदार एथलीट तैयार हुआ, लेकिन टेस्ट क्रिकेट को कुछ और चाहिए था। उन्होंने छोले भटूरे, आलू के पराठे और समोसे जैसी तली हुई पसंदीदा चीजें छोड़ दीं। 2018 के दक्षिण अफ्रीका दौरे पर सेहत की दिक्कतों के बाद वो शाकाहारी बन गए। कुछ ही समय बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि शाकाहारी एथलीट बनकर उन्हें समझ आया कि खानपान को लेकर उनकी कई मान्यताएं मिथक थीं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक वो डेयरी बहुत कम लेते हैं और टोफू और सोया पर ज्यादा भरोसा करते हैं। दिन भर खूब पानी पीते हैं। कभी-कभार अपनी पसंद की चीज भी खा लेते हैं। इंग्लैंड के खिलाफ 235 रन की पारी के बाद बसु ने उनसे कहा कि आज रात जो चाहो खा लो, तो कोहली ने चिकन बर्गर मंगाया और ऊपर का बन हटा दिया।

नई संस्कृति की सबसे साफ पहचान यो-यो टेस्ट बना, जो शटल रन वाला एंड्योरेंस टेस्ट है। यह करीब 2017 में कोहली की कप्तानी में आया और पास होने का मार्क 16.1 रखा गया, जो बाद में बढ़ाकर 16.5 कर दिया गया। अंबाती रायुडू, युवराज सिंह और सुरेश रैना जैसे नाम इसमें फेल होने पर टीम से बाहर रहे। मैसेज साफ था कि सिर्फ रन बनाना काफी नहीं होगा।

कोहली ने खुद पर भी यही पैमाना लगाया। 2023 में उन्होंने इंस्टाग्राम पर 17.2 का स्कोर डाला, हालांकि बीसीसीआई को किसी खिलाड़ी के स्कोर सार्वजनिक करने पर ऐतराज था। उस कैंप में शुभमन गिल 18.7 के साथ टॉप पर रहे। 2024-25 की बॉर्डर-गावस्कर सीरीज में भारत की 1-3 से हार के बाद खबर आई कि बोर्ड यो-यो टेस्ट को सख्त शर्त के तौर पर वापस लाने पर विचार कर रहा है।

इसका असर सबसे ज्यादा तेज गेंदबाजों में दिखा। बसु के मुताबिक 2015 से फिटनेस को बैटिंग, बॉलिंग और फील्डिंग की तरह एक नई स्किल माना गया, न कि महज खानापूर्ति। मैनेजमेंट ऐसा पेस ग्रुप चाहता था जो लगातार चलता रहे। बुमराह को तेजी से टेस्ट में लाया गया और बसु ने मोहम्मद शमी को 2017 और 2018 के मुश्किल दौर के बाद दोबारा खड़ा करने में मदद की। भारतीय तेज गेंदबाजों का पांच दिन तक अपनी रफ्तार बनाए रखना इस बदलाव के केंद्र में रहा।

बाद में भारत के स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच बने अंकित कलियार का कहना है कि कोहली ने टीम में कल्चर और अनुशासन बनाया। उनके मुताबिक जब टॉप का खिलाड़ी इतना फिट हो, तो बाकी उसके पीछे चलते हैं। कलियार ने यह भी कहा कि बैटिंग, स्किल और फिटनेस में गिल कोहली के रास्ते पर चलते हैं। 2019 में गिल, खलील अहमद और कुलदीप यादव ने कहा था कि वो कोहली और रोहित शर्मा के तय किए स्तर तक पहुंचना चाहते हैं। रोहित ने एक बार कहा था कि कोहली अपने पूरे करियर में एक बार भी नेशनल क्रिकेट एकेडमी के एक्सपर्ट्स के पास नहीं गए, और उन्होंने नए खिलाड़ियों से इस भूख से सीखने को कहा।

आराम वो हिस्सा है जो किसी को दिखता नहीं। एक वनडे सीरीज के दौरान किए गए ट्वीट में कोहली ने अपने अच्छे दिन का नक्शा बताया था: ट्रेनिंग, मसाज, रिकवरी पूल सेशन, अच्छा खाना और लंबी नींद। हाल में उन्होंने नींद को अपनी रूटीन की बुनियाद बताया और कहा कि जब नींद अच्छी होती है तो आइस बाथ या पूल सेशन जैसी अलग रिकवरी की जरूरत नहीं पड़ती। मानसिक सेहत पर भी वो उतना ही खुलकर बोले हैं। 2014 के इंग्लैंड दौरे के अपने संघर्ष का उदाहरण देकर वो बार-बार कह चुके हैं कि भारतीय क्रिकेट को मेंटल हेल्थ के लिए पेशेवर मदद चाहिए।

38 की उम्र में कोहली टेस्ट और टी20 इंटरनेशनल से रिटायर हो चुके हैं और अब वनडे खेलते हैं। 2027 का वर्ल्ड कप उनका अगला बड़ा लक्ष्य है। वो इस दौड़ में कितना टिकेंगे, यह उसी रूटीन पर निर्भर करेगा जो उन्होंने सालों पहले बनाई थी। रनों का आखिरी आंकड़ा जो भी हो, उनके असर का सबूत उनके आसपास के ड्रेसिंग रूम में दिखता है। आज के नौजवान भारतीय खिलाड़ी से उम्मीद की जाती है कि वो वेट उठाए, दौड़े, सोच-समझकर खाए और वक्त पर सोए, और इनमें से ज्यादातर ने ये आदतें कोहली को देखकर सीखी हैं।

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