तीन एक्सप्रेसवे और खनिज कॉरिडोर में लगेगी 6.17 करोड़ मीट्रिक टन फ्लाई ऐश
महाजेनको और MSRDC के बीच करार हुआ है। इसके तहत पूर्वी महाराष्ट्र के प्रोजेक्ट्स में थर्मल पावर प्लांट की फ्लाई ऐश इस्तेमाल होगी।
महाराष्ट्र में थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली करीब 6.17 करोड़ मीट्रिक टन फ्लाई ऐश अब सड़क और खनिज ढुलाई के प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल होगी। इसके लिए महाजेनको और महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर दस्तखत हुए हैं। यह राख पूर्वी महाराष्ट्र के तीन प्रस्तावित एक्सप्रेसवे और एक खनिज परिवहन कॉरिडोर में लगाई जाएगी।
करार पर दस्तखत ऊर्जा राज्यमंत्री मेघना साकोरे-बोर्डिकर की मौजूदगी में हुए। मकसद यह है कि फ्लाई ऐश का टिकाऊ तरीके से इस्तेमाल हो, इंफ्रास्ट्रक्चर के काम को सहारा मिले और राख को लंबे वक्त तक जमा रखने से जुड़े पर्यावरण के जोखिम कम हों। राख के इस्तेमाल की प्रस्तावित अवधि जनवरी 2027 से दिसंबर 2028 तक है।
चार प्रोजेक्ट्स में सबसे ज्यादा फ्लाई ऐश नागपुर-चंद्रपुर एक्सप्रेसवे में लगेगी, यानी 2.79 करोड़ मीट्रिक टन। बाकी प्रोजेक्ट्स का अनुमानित हिसाब इस तरह है: नागपुर-गोंदिया एक्सप्रेसवे में 2.09 करोड़ मीट्रिक टन, भंडारा-गढ़चिरोली एक्सप्रेसवे में 1.14 करोड़ मीट्रिक टन और नवेगांव मोरे-सुरजागढ़ खनिज परिवहन कॉरिडोर में 0.15 करोड़ मीट्रिक टन।
नागपुर इलाके के प्रोजेक्ट्स को फ्लाई ऐश कोराडी या खापरखेड़ा थर्मल पावर प्लांट से मिलेगी, जबकि चंद्रपुर इलाके के प्रोजेक्ट्स को सप्लाई चंद्रपुर प्लांट से होगी। ये मात्राएं तकनीकी जरूरत, साइट की असली हालत और फ्लाई ऐश की उपलब्धता के हिसाब से बदल भी सकती हैं।
MoU पर महाजेनको के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर राधाकृष्णन बी और MSRDC के वाइस-चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अनिलकुमार बी गायकवाड़ ने दस्तखत किए। इस मौके पर महाजेनको के निदेशक (प्रोजेक्ट्स) अभय harane, कार्यकारी निदेशक (पर्यावरण) डॉ नितिन वाघ, MSRDC के मुख्य महाप्रबंधक (पर्यावरण) नरेंद्र टोके और दूसरे अधिकारी भी मौजूद थे।
आगे हर प्रोजेक्ट के लिए अलग से तीन-पक्षीय करार होंगे। ये करार संबंधित थर्मल पावर प्लांट, MSRDC और अधिकृत ठेकेदारों या दूसरी संबंधित एजेंसियों के बीच होंगे। इनमें प्रोजेक्ट के हिसाब से मात्रा, सप्लाई का शेड्यूल, ढुलाई का इंतजाम और आर्थिक सहायता की शर्तें तय की जाएंगी। आर्थिक सहायता के पात्र दावों पर कार्रवाई तभी होगी, जब फ्लाई ऐश की नपाई हो जाए, उसके इस्तेमाल का प्रमाणन हो जाए और जरूरी कागजात जांच लिए जाएं।
इस पहल का लक्ष्य फ्लाई ऐश का 100 प्रतिशत इस्तेमाल है। यह केंद्र सरकार की 31 दिसंबर 2021 की फ्लाई ऐश अधिसूचना और महाराष्ट्र सरकार की 19 सितंबर 2025 की फ्लाई ऐश उपयोग नीति के मुताबिक है। उम्मीद है कि इस करार से थर्मल पावर प्लांट में जमा राख का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो सकेगा, लंबे भंडारण से जुड़े पर्यावरण और कामकाज के जोखिम घटेंगे और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए सप्लाई की व्यवस्था बनेगी।
MoU 31 मार्च 2032 तक या संबंधित प्रोजेक्ट्स पूरे होने तक, जो भी पहले हो, लागू रहेगा। दोनों संस्थाओं के सक्षम अधिकारियों की मंजूरी से इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है।
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