सूखाग्रस्त तालुकों में खुलेंगे CMRF सहायता सेल, फडणवीस ने दी मंजूरी
राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री सहायता निधि की मदद सूखे से प्रभावित तालुकों तक पहुंचाने के लिए तालुका स्तर पर सेल बनाने का फैसला किया है।
महाराष्ट्र सरकार ने मुख्यमंत्री सहायता निधि (CMRF) का सहायता सेल अब तालुका स्तर तक ले जाने का फैसला किया है। मकसद यह है कि सूखे से प्रभावित इलाकों के जरूरतमंद मरीजों को वक्त पर इलाज और आर्थिक मदद मिल सके। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके तहत स्वास्थ्य सेवाओं का तालमेल बिठाने के लिए अलग से मेडिकल ऑफिसर भी नियुक्त किए जाएंगे।
सामान्य प्रशासन विभाग ने शुक्रवार को इस बारे में सरकारी आदेश (GR) जारी किया। आदेश के मुताबिक ये सेल उन सभी तालुकों में बनेंगे, जहां 2026 के खरीफ सीजन में Trigger-1 के तहत सूखा घोषित किया गया था। जिला और तालुका स्तर पर स्वास्थ्य समन्वय समितियां भी बनाई जाएंगी। सरकार चाहती है कि CMRF की मदद सूखा प्रभावित इलाकों के लोगों के और करीब पहुंचे और जरूरतमंद मरीजों की पहचान बिना देरी के हो।
ये सहायता सेल संबंधित पंचायत समिति के दफ्तरों से चलेंगे। हर सेल के प्रमुख के तौर पर जिला कलेक्टर एक स्वतंत्र मेडिकल ऑफिसर नियुक्त करेंगे। उनके साथ एक क्लर्क और एक टाइपिस्ट भी रहेगा। जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं प्राथमिकता से देने की जिम्मेदारी ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसरों की होगी।
सेल का काम मरीजों को CMRF से आर्थिक मदद मांगने से पहले मौजूदा सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का फायदा दिलाना होगा। पात्र मरीजों को पहले आयुष्मान भारत, महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना, श्रम विभाग की योजनाओं और चैरिटेबल अस्पतालों की इलाज सुविधाओं के तहत इलाज दिलाने की कोशिश होगी। जो मरीज इन योजनाओं के पात्र नहीं होंगे, उनके आवेदन संबद्ध अस्पतालों के जरिए ऑनलाइन सिस्टम से मंजूरी के लिए भेजे जाएंगे। आवेदन की प्रक्रिया में सेल मरीजों का मार्गदर्शन करेगा।
सेल प्रमुख उप-जिला अस्पतालों, ग्रामीण अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, उप-केंद्रों और आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं के जरिए जरूरतमंद मरीजों की पहचान करेंगे। यह देखना भी उनकी जिम्मेदारी होगी कि कोई मरीज इलाज से वंचित न रह जाए।
तालुका स्तर की समिति के अध्यक्ष स्थानीय विधायक होंगे और सह-अध्यक्ष उप-विभागीय अधिकारी (राजस्व) होंगे। तहसीलदार, ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर, तालुका स्वास्थ्य अधिकारी, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के प्रतिनिधि इसके सदस्य होंगे। सहायता सेल का प्रमुख सदस्य सचिव रहेगा।
जिला स्तर पर समिति की अध्यक्षता पालक मंत्री करेंगे और जिला कलेक्टर सह-अध्यक्ष होंगे। जिला स्वास्थ्य अधिकारी सदस्य सचिव की भूमिका में रहेंगे। इसके अलावा चिकित्सा क्षेत्र के दो समाजसेवी गैर-सरकारी सदस्य के रूप में नियुक्त किए जाएंगे।
सरकार महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल, स्थानीय मेडिकल एसोसिएशनों और निजी अस्पतालों से जुड़े स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद लेगी। सूखा प्रभावित इलाकों में हेल्थ कैंप लगाए जाएंगे, जहां मरीजों को दवाइयां और इलाज मिलेगा।
जिला और तालुका, दोनों समितियों को हर महीने कम से कम दो बैठकें करनी होंगी। इनमें दूरदराज के इलाकों, घनी आबादी वाले क्षेत्रों और जहां स्वास्थ्य सुविधाएं कम हैं, वहां इलाज को प्राथमिकता देने के लिए जगहें तय की जाएंगी। समितियां पीने के पानी और गर्मी से जुड़ी बीमारियों की समीक्षा करेंगी और हेल्थ कैंप, मोबाइल मेडिकल टीमों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाओं की योजना बनाएंगी। महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और डायबिटीज व हाइपरटेंशन के मरीजों पर खास ध्यान दिया जाएगा।
तालुका स्तर के सेल अपनी गतिविधियों और मेडिकल कैंपों की रिपोर्ट रोज जिला स्तर के सेल को भेजेंगे। जिला सेल सभी तालुकों की रिपोर्ट इकट्ठा करके मंत्रालय में बैठे CMRF सेल को भेजेंगे।
CMRF और चैरिटेबल हॉस्पिटल्स सहायता सेल के प्रमुख रामेश्वर नाइक ने इस फैसले का मकसद बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य राहत निधि की व्यवस्था को आम लोगों के लिए ज्यादा सुलभ बनाना है। उन्होंने कहा कि इस विस्तार से सूखा प्रभावित इलाकों में जरूरतमंद मरीजों की समय पर पहचान होगी और उन्हें उचित इलाज व आर्थिक मदद मिल सकेगी। जहां जरूरी होगा, वहां मौजूदा स्वास्थ्य योजनाओं और CMRF की मदद के बीच बेहतर तालमेल भी बनेगा। नाइक के मुताबिक असल मकसद यह पक्का करना है कि पैसों की तंगी की वजह से कोई जरूरतमंद मरीज इलाज से वंचित न रहे।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।