बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

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सिंधुदुर्ग के आईएनएस गुलदार प्रोजेक्ट को द वीक हेरिटेज अवॉर्ड 2026

सिंधुदुर्ग के आईएनएस गुलदार प्रोजेक्ट को द वीक हेरिटेज अवॉर्ड 2026 तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कल्चर PT24 संस्कृति डेस्क

महाराष्ट्र पर्यटन विकास महामंडल के प्रोजेक्ट को गोल्डन बनयान अवॉर्ड मिला।

महाराष्ट्र के समुद्री पर्यटन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। सिंधुदुर्ग जिले में महाराष्ट्र पर्यटन विकास महामंडल (MTDC) के आईएनएस गुलदार प्रोजेक्ट को द वीक हेरिटेज अवॉर्ड - गोल्डन बनयान अवॉर्ड 2026 दिया गया है। पर्यटन मंत्री शंभुराज देसाई ने इसे राज्य के लिए गर्व की बात बताया। इस प्रोजेक्ट का मकसद देश का पहला अंडरवॉटर म्यूजियम, आर्टिफिशियल रीफ और सबमरीन पर्यटन स्थल तैयार करना है।

यह अवॉर्ड 27 अक्टूबर को नई दिल्ली के प्राइम मिनिस्टर्स म्यूजियम एंड लाइब्रेरी में द वीक पत्रिका के कार्यक्रम में दिया गया। केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अवॉर्ड सौंपा। MTDC के प्रबंध निदेशक नीलेश गात्ने ने इसे स्वीकार किया। कार्यक्रम में सिंधुदुर्ग की कलेक्टर तृप्ति धोडमिसे, MTDC के क्षेत्रीय अधिकारी दीपक माने, अधीक्षक अभियंता संजय पाटिल, जलपर्यटन की वरिष्ठ प्रबंधक क्षिप्रा बोरा और मुख्य लेखा अधिकारी जितेंद्र सोनावणे भी मौजूद थे।

देसाई ने कहा कि यह अवॉर्ड महाराष्ट्र के पर्यटन विकास में एक अहम पड़ाव है। उन्होंने राज्य की पर्यटन पहलों का श्रेय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार के नेतृत्व को दिया। उनके मुताबिक यह प्रोजेक्ट पारंपरिक पर्यटन को नए अनुभवों से जोड़ता है और सिंधुदुर्ग के लिए नए मौके खोल सकता है। मंत्री ने प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को भी बधाई दी।

पर्यटन सचिव संजय यादव ने कहा कि यह अवॉर्ड महाराष्ट्र की उन कोशिशों को मान्यता देता है, जिनमें समुद्री विरासत को सहेजते हुए पर्यावरण के लिहाज से टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य ऐसे उच्च गुणवत्ता वाले पर्यटन स्थल बनाने पर काम कर रहा है, जो सैलानियों को खींच सकें और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकें।

नीलेश गात्ने ने बताया कि भारतीय नौसेना के इस पूर्व जहाज को खास पर्यटन आकर्षण के तौर पर विकसित किया जा रहा है, ताकि सिंधुदुर्ग का समुद्री पर्यटन मजबूत हो। गात्ने के मुताबिक प्रोजेक्ट से जिले को नई पर्यटन पहचान मिलने की उम्मीद है। साथ ही ठहरने की सुविधा देने वाले, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर, टूरिस्ट गाइड और दूसरे सेवा प्रदाताओं जैसे स्थानीय कारोबारियों के लिए मौके बनेंगे।

यह प्रोजेक्ट महाराष्ट्र पर्यटन विभाग के तहत MTDC मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के साथ मिलकर विकसित कर रहा है। सेवामुक्त हो चुके इस नौसैनिक जहाज को सिंधुदुर्ग तट के पास निवती रॉक के नजदीक पानी के नीचे रखा गया है। प्रोजेक्ट केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की Special Assistance to States for Capital Investment: Development of Iconic Tourist Centres to Global Scale योजना के तहत बन रहा है। केंद्र ने इसके लिए 46.91 करोड़ रुपये दिए हैं, जबकि महाराष्ट्र सरकार ने 112.46 करोड़ रुपये मुहैया कराए हैं।

मगर क्लास का यह लैंडिंग शिप टैंक भारतीय नौसेना में 39 साल तक सेवा देने के बाद 12 जनवरी 2024 को सेवामुक्त हुआ था। 19 मई 2026 को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड की मदद से इसे निवती रॉक के पास करीब 22 मीटर की गहराई में समुद्र तल पर रखा गया। इसका स्टील ढांचा आर्टिफिशियल रीफ का काम करेगा और समुद्री जैव विविधता, कोरल की बढ़त, मछली संसाधन और पर्यावरणीय संतुलन में मदद करेगा।

सैलानी जेटी से स्पीडबोट के जरिए निवती रॉक तक जाएंगे और वहां मौजूद बार्ज पर सवार होंगे। पानी में डूबे जहाज और आसपास के समुद्री जीवन को सबमरीन टूर और स्कूबा डाइविंग के जरिए देखा जा सकेगा। योजना में रेक डाइविंग, सबमरीन टूर, 12 मीटर तक Discover Scuba Diving, 18 मीटर तक सर्टिफाइड डाइव, 30 मीटर तक एडवांस्ड डाइविंग अनुभव, अंडरवॉटर फोटोग्राफी, समुद्री शिक्षा और रिसर्च शामिल हैं।

प्रोजेक्ट की प्रेरणा अमेरिका के फ्लोरिडा में USS Oriskany और ऑस्ट्रेलिया में HMAS Swan जैसे अंतरराष्ट्रीय रेक-डाइविंग स्थलों से ली गई है। इसे अंडरवॉटर म्यूजियम और आर्टिफिशियल रीफ पर्यटन स्थल के रूप में देखा जा रहा है, जो सिंधुदुर्ग को समुद्री पर्यटन के नक्शे पर ला सकता है।

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