मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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पुणे के सासवड में बनेगा देश का पहला रोड सेफ्टी ट्रेनिंग और रिसर्च इंस्टिट्यूट

पुणे के सासवड में बनेगा देश का पहला रोड सेफ्टी ट्रेनिंग और रिसर्च इंस्टिट्यूट तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 शहर डेस्क

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने सोमवार को प्रस्तावित जगह का निरीक्षण किया और अधिकारियों को ऊंचे मानक पर काम करने का निर्देश दिया।

महाराष्ट्र पुणे जिले के सासवड में देश का पहला रोड सेफ्टी ट्रेनिंग और रिसर्च इंस्टिट्यूट बनाने जा रहा है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने सोमवार को प्रस्तावित जगह का दौरा किया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यह प्रोजेक्ट आधुनिक तकनीक और बुनियादी ढांचे के साथ ऊंचे मानक पर तैयार किया जाए।

एक सरकारी बयान के मुताबिक यह इंस्टिट्यूट पुरंदर तालुका के सासवड में 25 एकड़ की जगह पर बन रहा है। दौरे के दौरान सरनाईक ने ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS), ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक (ADTT) और प्रस्तावित रोड सेफ्टी ट्रेनिंग और रिसर्च इंस्टिट्यूट के काम की प्रगति देखी।

ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन में सेंसर और कैमरों की मदद से गाड़ियों के ब्रेक, सस्पेंशन, लाइट और एमिशन लेवल की जांच होगी। राज्य सरकार के मुताबिक इस ऑटोमेटेड सिस्टम से गाड़ियों की फिटनेस जांच ज्यादा पारदर्शी, सटीक और वैज्ञानिक होगी। उम्मीद है कि गाड़ी की टेस्टिंग में लगने वाला वक्त भी घटेगा और सड़कों पर चलने वाली गाड़ियां ज्यादा सुरक्षित होंगी।

वहीं ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर ड्राइवरों की स्किल अलग-अलग टेस्ट से परखी जाएगी। इनमें आठ के आकार (फिगर-एट) और H आकार के ट्रैक, ढलान और मोड़ वाले हिस्से शामिल हैं। टेस्ट में आधुनिक तकनीक और वीडियो एनालिटिक्स का इस्तेमाल होगा। उम्मीद है कि इससे ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया ज्यादा निष्पक्ष और भरोसेमंद बनेगी।

प्रस्तावित राज्य स्तरीय रोड सेफ्टी ट्रेनिंग और रिसर्च इंस्टिट्यूट में मोटर वाहन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जाएगी। इसमें आधुनिक तकनीक, मोटर वाहन कानूनों में हुए बदलाव, रोड सेफ्टी और ट्रैफिक मैनेजमेंट की जानकारी दी जाएगी। इस पहल का मकसद विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाना और रोड सेफ्टी के इंतजाम मजबूत करना है।

निरीक्षण के दौरान सरनाईक ने कहा कि सड़क हादसे घटाने के लिए सिर्फ नियम लागू करना काफी नहीं है। इसके लिए आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित स्टाफ और वैज्ञानिक नजरिया जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सासवड की यह सुविधा ऐसे स्तर पर तैयार की जाए कि पूरे देश के लिए मिसाल बने।

अधिकारियों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट से महाराष्ट्र में गाड़ियों की सुरक्षा, ड्राइविंग स्किल और रोड सेफ्टी मैनेजमेंट की कुल गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद है।

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