पालघर के दो परीक्षा केंद्रों पर बीकॉम परीक्षा में नकल के आरोप, छात्रों ने मांगी जांच
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मुंबई यूनिवर्सिटी के बीकॉम परीक्षार्थियों ने पालघर के जव्हार और विक्रमगढ़ केंद्रों पर स्टाफ की मदद से नकल कराए जाने का आरोप लगाया है।
मुंबई यूनिवर्सिटी से जुड़े पालघर के दो परीक्षा केंद्रों पर बीकॉम (बैचलर ऑफ कॉमर्स) की परीक्षा दे रहे छात्रों ने गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। छात्रों का दावा है कि इन केंद्रों पर स्टाफ के सदस्य उन्हीं कॉलेजों में दाखिला लिए हुए उम्मीदवारों को नकल करने में मदद कर रहे थे।
आरोप जव्हार के गोखले एजुकेशन सोसायटी के आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज और विक्रमगढ़ के संजीवन ग्रामीण वैद्यकीय और सामाजिक साहित्य प्रतिष्ठान के आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज को लेकर हैं। दोनों कॉलेज पालघर में हैं। इन संस्थाओं के बाहर से परीक्षा देने आए छात्रों ने सवाल उठाया है कि क्या परीक्षाएं निष्पक्ष तरीके से हो रही हैं। उन्होंने मुंबई यूनिवर्सिटी (MU) से जांच की मांग की है।
छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि परीक्षा हॉल के अंदर सीसीटीवी कैमरे नहीं थे। एक और परीक्षार्थी प्रदीप अघारी ने कहा, "अगर अधिकारियों को भरोसा है कि सब कुछ निष्पक्ष तरीके से हो रहा है, तो वे सीसीटीवी फुटेज दिखाएं और हमारे उठाए शक दूर करें। किसी भी क्लासरूम के किसी कोने में सीसीटीवी नहीं था। परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए।"
उम्मीदवारों ने दोनों केंद्रों पर पीने के पानी की कमी और वॉशरूम की खराब हालत की भी शिकायत की है। उनका आरोप है कि यूनिवर्सिटी की परीक्षा दे रहे छात्रों के लिए ये इंतजाम काफी नहीं थे।
छात्रों की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। उनका दावा है कि परीक्षा केंद्र आखिरी वक्त पर बदल दिए गए, जिससे नई जगहों को समझने में उन्हें भागदौड़ करनी पड़ी। छात्रों के मुताबिक अपने क्लासरूम तक पहुंचाने के लिए सही साइनबोर्ड भी नहीं थे और स्टाफ से उन्हें बहुत कम मदद मिली। परीक्षा दे रहे उदया गुप्ता ने कहा, "हमें अपने क्लासरूम खुद ढूंढने पड़े, न सही दिशा बताई गई, न साइनबोर्ड थे। इससे उलझन हुई और कुछ छात्र परीक्षा हॉल में देर से पहुंचे।"
शिकायत करने वालों में से एक नील चव्हाण ने बताया कि छात्र कई बार शिकायत लिख चुके हैं। उन्होंने कहा, "हमने कई शिकायतें लिखी हैं। कई छात्रों के दस्तखत वाले ताजा शिकायती पत्र को लगभग 10 दिन हो गए हैं, लेकिन न कोई जवाब आया है और न कोई कार्रवाई हुई है।"
छात्रों की चिंताओं पर मुंबई यूनिवर्सिटी के एक अधिकारी ने कहा कि संस्था इस मामले को तुरंत देखेगी और नियमों के मुताबिक कार्रवाई करेगी।
परीक्षा केंद्रों के लिए तय प्रक्रिया में प्रश्नपत्र छपवाने की व्यवस्था करना, नियुक्ति या असाइनमेंट पत्र जांचना, नमूना उत्तर पुस्तिका जमा करना और सॉफ्टवेयर से जांच कर बारकोड स्टिकर लगाना शामिल है। केंद्रों को मूल टाइमटेबल के हिसाब से मिले प्रश्नपत्रों की कुल संख्या दर्ज करनी होती है और छात्रों की गिनती के मुकाबले 'नो कैंडिडेट' (NC) की संख्या भी लिखनी होती है। परीक्षा से पहले मॉक ड्रिल के लिए सर्कुलर जारी करना भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
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