मुंबई में बदनाम प्रतिभा बिल्डिंग की जगह 33 मंजिला टावर की तैयारी
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ब्रीच कैंडी में 1984 के अप्रूवल स्कैंडल से जुड़ी प्रतिभा कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी की जगह 179.4 मीटर ऊंचा नया टावर प्लान किया गया है।
साउथ मुंबई की प्रतिभा कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी, जो 1984 में एक बड़े कंस्ट्रक्शन अप्रूवल स्कैंडल की वजह से सुर्खियों में आई थी, अब रीडेवलपमेंट के लिए तैयार है। उसकी जगह 179.4 मीटर ऊंचा, 33 मंजिला टावर बनाने की योजना है। यह टावर ब्रीच कैंडी के पॉश इलाके में सोफिया कॉलेज के पास प्लान किया गया है। इसमें रेजिडेंशियल अपार्टमेंट होंगे और साथ में रिक्रिएशनल फैसिलिटीज़ भी।
डेवलपर क्रेस्ट रेजीडेंसी ने इमारत के प्रस्तावित लेआउट की रूपरेखा पेश की है। इस लेआउट को महाराष्ट्र कोस्टल ज़ोन मैनेजमेंट अथॉरिटी (MCZMA) से क्लियरेंस मिल चुका है।
प्रस्तावित टावर में एक बेसमेंट होगा, फिर ग्राउंड और मेज़ानाइन फ्लोर, छह पोडियम लेवल और एक एमेनिटी फ्लोर। आठवीं से 32वीं मंजिल तक रेजिडेंशियल अपार्टमेंट रहेंगे, जबकि 33वीं मंजिल पर रिक्रिएशनल फैसिलिटीज़ और एक फिटनेस सेंटर बनेगा।
रीडेवलपमेंट के तहत प्लॉट पर बने एक मंज़िला बंगले को भी गिराया जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक ओरिजिनल सोसाइटी मेंबर्स को नए टावर में लगभग 3,300 स्क्वेयर फीट के अपार्टमेंट मिल सकते हैं।
कोर्ट केस को लेकर MCZMA ने कहा कि प्रॉपर्टी से जुड़े कुछ मामले पेंडिंग थे। इस पर क्रेस्ट रेजीडेंसी का कहना है कि किसी भी कोर्ट ऑर्डर ने प्रोजेक्ट पर रोक नहीं लगाई है। डेवलपर ने यह भी बताया कि एनवायरनमेंटल वायलेशन से जुड़ी कोई लिटिगेशन प्रोसीडिंग या कंप्लेंट पेंडिंग नहीं है।
अब पुराने मामले पर आते हैं। 36 मंजिला ओरिजिनल प्रतिभा बिल्डिंग 1984 में चर्चा में आई, जब उस समय के मुंबई कलेक्टर अरुण भाटिया ने बिल्डिंग अप्रूवल की जांच की और बताए गए प्लॉट एरिया में गड़बड़ियां पाईं।
कहा जाता है कि बिल्डर ने प्लॉट का एरिया 9,282 स्क्वायर मीटर से ज़्यादा बताया था, जबकि असली एरिया 7,197 स्क्वायर मीटर था। कथित तौर पर इस बढ़ाकर बताए गए आंकड़े की वजह से 27,000 स्क्वायर फीट का एक्स्ट्रा फ्लोर स्पेस मिल गया।
लीगल प्रोसीडिंग्स के बाद 1990 के दशक के बीच में बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) ने ऊपर की आठ मंजिलों को गैर-कानूनी घोषित किया और उन्हें गिरा दिया। इससे टावर 28 मंजिलों का रह गया। बाकी स्ट्रक्चर दो दशक से ज़्यादा वक्त तक खड़ा रहा और फरवरी 2019 में उसे पूरी तरह गिरा दिया गया। इससे रीडेवलपमेंट के लिए जगह खाली हो गई।
अरुण भाटिया ने बाद में बताया कि कथित गड़बड़ियों का खुलासा करने के तुरंत बाद उनका ट्रांसफर कर दिया गया था। पूर्व सिविक चीफ शरद काले ने भी याद किया कि ज़मीन के रिकॉर्ड में बदलाव किया गया था। उनके मुताबिक रेवेन्यू डिपार्टमेंट के एक अधिकारी को जेल हो गई थी।
विवादित इतिहास के बावजूद इस बिल्डिंग ने अमीर खरीदारों को खींचा, जिनमें हाई-नेट-वर्थ लोग, नॉन-रेसिडेंट इंडियन और प्राइवेट कंपनियां शामिल थीं। बताया गया है कि मशहूर प्लेबैक सिंगर लता मंगेशकर और आशा भोसले भी इसके ओरिजिनल खरीदारों में थीं।
रीडेवलपमेंट प्लान में देरी होती रही। 2012 में हाउसिंग सोसाइटी ने प्रॉपर्टी के लिए Rs 900 करोड़ के रिज़र्व प्राइस पर बोलियां मंगाई थीं, लेकिन खबर है कि उस वैल्यूएशन पर कोई खरीदार नहीं मिला। ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल के बारे में भी अफवाह थी कि वह अपनी जगह बढ़ाना चाहता है। अब प्रस्तावित 179.4 मीटर का टावर इस साइट को नई पहचान देगा और मुंबई के एक बड़े कंस्ट्रक्शन विवाद के लिए याद की जाने वाली इमारत की जगह मॉडर्न रेजिडेंशियल डेवलपमेंट खड़ा करेगा।
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