कोल्हापुर के तिलारी जंगल में मिली घोंघे की नई सूक्ष्म प्रजाति
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शोधकर्ताओं ने कोल्हापुर जिले के तिलारी नगर के जंगल में घोंघे की नई प्रजाति Dicharax tilariensis खोजी है।
कोल्हापुर जिले के तिलारी नगर के अर्ध-सदाबहार जंगलों में शोधकर्ताओं को घोंघे की एक नई सूक्ष्म प्रजाति मिली है। इसका नाम Dicharax tilariensis रखा गया है। यह ज़मीन पर रहने वाला घोंघा है और आकार में सिर्फ कुछ मिलीमीटर का होता है।
फिलहाल यह प्रजाति सिर्फ उसी जगह से जानी जाती है जहां यह मिली, यानी स्वप्नवेल पॉइंट के पास। इसे थैकरे वाइल्डलाइफ फाउंडेशन के अमृत भोसले, तेजस ठाकरे और अक्षय खांडेकर ने बयान किया है। उनका पेपर 24 अक्टूबर को Journal of Conchology में छपा।
यह अपनी जीनस की दूसरी ऐसी प्रजाति है जो उत्तरी पश्चिमी घाट से बयान की गई है और सिर्फ वहीं पाई जाती है।
घोंघे का खोल सफेद सा है, जिस पर गुलाबी या भूरे रंग की हल्की झलक है। इसकी चौड़ाई 4.21 से 4.87 मिलीमीटर और ऊंचाई 3.01 से 3.52 मिलीमीटर है। पेपर के एक लेखक अमृत भोसले ने कहा, "हमारी टीम ने खोल की बनावट के फर्क से इस नई प्रजाति को पश्चिमी घाट और दक्षिण भारत में मिलने वाली चार मिलती-जुलती प्रजातियों से अलग पहचाना। इनमें ऊंचा उठा हुआ सिरा, पसलियों के खास पैटर्न और खोल पर एक तेज उभार शामिल हैं।"
शोधकर्ता अक्षय खांडेकर ने कहा, "इन नतीजों से पता चलता है कि पश्चिमी घाट की जैव विविधता को समझने के लिए छोटी और अक्सर नज़रअंदाज़ होने वाली प्रजातियों का रिकॉर्ड रखना कितना ज़रूरी है। Dicharax प्रजाति घने जंगल की छतरी और ढेर सारे सूखे पत्तों वाली जगहों पर मिली, जबकि कम पेड़ों वाले इलाकों में सर्वे के दौरान एक भी नमूना नहीं मिला।"
अध्ययन में इस नए घोंघे की संरक्षण स्थिति तय नहीं की गई है। चूंकि यह अभी सिर्फ अपनी खोज वाली जगह से जानी जाती है, इसलिए इसका दायरा कितना बड़ा है, यह पता करने के लिए आगे और व्यवस्थित फील्ड सर्वे करने होंगे।
वाइल्डलाइफ शोधकर्ता तेजस ठाकरे ने कहा, "ज़मीनी घोंघे बारिश के मौसम में सबसे ज़्यादा सक्रिय रहते हैं और मौसम के उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील होते हैं। इसी वजह से वे पर्यावरण में बदलाव और जंगल की सेहत के अहम संकेतक माने जाते हैं। जंगल के इकोसिस्टम में ये सड़ते हुए पत्ते खाते हैं, पोषक तत्वों के चक्र में हिस्सा लेते हैं और दूसरे जानवरों के लिए खाना और कैल्शियम का स्रोत भी बनते हैं।"
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