झिशान सिद्दिकी बने मुंबई राष्ट्रवादी कांग्रेस अध्यक्ष, कार्याध्यक्ष सिद्धार्थ कांबले ने दिया इस्तीफा
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अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस ने झिशान सिद्दिकी को मुंबई अध्यक्ष बनाया है। इसके बाद मुंबई कार्याध्यक्ष सिद्धार्थ कांबले ने फेसबुक पोस्ट के जरिए पद छोड़ने की घोषणा की।
राज्य में विधान परिषद की 5 सीटों के चुनाव के बाद अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने एक बड़ा फैसला लिया है। पार्टी ने झिशान सिद्दिकी को मुंबई अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। खबर के मुताबिक यह नियुक्ति पार्थ पवार की पहल पर हुई है। सिद्दिकी के मुंबई अध्यक्ष बनने से राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
इसी बीच मुंबई अध्यक्ष की इस नियुक्ति को लेकर पार्टी के भीतर नाराजगी भी सामने आई है। झिशान सिद्दिकी के अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी के मुंबई कार्याध्यक्ष सिद्धार्थ कांबले ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह जानकारी उन्होंने खुद फेसबुक पर पोस्ट करके दी।
कांबले ने यह भी बताया कि राष्ट्रवादी कांग्रेस के मुंबई के पदाधिकारी इस नियुक्ति के विरोध में जल्द ही पार्टी के अध्यक्ष से मिलने वाले हैं। इसी वजह से मुंबई अध्यक्ष के चयन को लेकर पार्टी में नाराजगी की बात सामने आई है।
अपनी पोस्ट की शुरुआत में कांबले ने लिखा कि दादा का साथ छूट गया, लेकिन उनके विचार आज भी जिंदा हैं। उन्होंने लिखा कि पद भले छोड़ दिया हो, निष्ठा का दीया लगातार जल रहा है। कांबले के मुताबिक पार्टी की स्थापना से लेकर पिछले 27 साल उन्हें अजितदादा पवार के मार्गदर्शन में काम करने का मौका मिला। उन्होंने लिखा कि इस लंबे सफर में दादा ने एक दलित चेहरे के तौर पर और सहकारिता में उनका काम देखकर समय-समय पर उन्हें ताकत दी।
कांबले ने पोस्ट में लिखा कि दुर्भाग्य से 9 महीने पहले दादा का निधन हो गया और तब से उन्हें सही मायने में अनाथ होने का एहसास हो रहा है। उनके मुताबिक दादा के बाद पार्टी की कमान सुनेत्रा भाभी बहुत ताकत और संयम से संभाल रही हैं। उन्होंने लिखा कि इसमें पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे और राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष प्रफुल पटेल उन्हें मजबूत साथ दे रहे हैं। कांबले ने कहा कि वरिष्ठ नेतृत्व के मार्गदर्शन में वे भी मुंबई में उतनी ही ताकत से काम कर रहे हैं।
मुंबई अध्यक्ष की नियुक्ति पर कांबले ने पोस्ट में लिखा कि पार्टी चलाते वक्त भाभी को कई बार कठोर और मन के खिलाफ फैसले लेने पड़ते हैं, इसका उन्हें पूरा एहसास है। उन्होंने लिखा कि भाभी के फैसले का वे दिल से सम्मान करते हैं। लेकिन काफी सोच-विचार के बाद उन्होंने मुंबई कार्याध्यक्ष की जिम्मेदारी से मुक्त होने का फैसला लिया है।
कांबले के मुताबिक अजित दादा और प्रदेशाध्यक्ष सांसद सुनील तटकरे साहब ने उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी थी, उसे उन्होंने पिछले ढाई साल में ईमानदारी और निष्ठा से, तन, मन और धन से निभाने की कोशिश की। उन्होंने पोस्ट में यह भी लिखा कि पद पर रहें या न रहें, आगे भी पार्टी के एक निष्ठावान कार्यकर्ता के तौर पर सुनेत्रा भाभी और सुनील तटकरे साहब के मार्गदर्शन में ही काम करते रहेंगे।
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