गोराई मैंग्रोव पार्क 10 से 15 दिन में खुल सकता है, छह महीने से उद्घाटन का इंतजार
33.43 करोड़ रुपये की लागत से बना पार्क काम पूरा होने के छह महीने बाद भी बंद है। वन विभाग को दिवाली से पहले इसे खोलने की उम्मीद है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
मुंबई के गोराई में बना भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी मैंग्रोव पार्क, जिसे गोराई मैंग्रोव पार्क भी कहा जाता है, आखिरकार आम लोगों के लिए खुल सकता है। वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अगले 10 से 15 दिन में पार्क का उद्घाटन होने की संभावना है, बशर्ते सब कुछ योजना के मुताबिक चले।
इस पार्क पर 33.43 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं और लोग इसका बहुत दिनों से इंतजार कर रहे हैं। उद्घाटन की राह देखते हुए इसे छह महीने से ज्यादा हो चुके हैं। खुलने के बाद लोग मैंग्रोव के जंगल के बीच बने ऊंचे बोर्डवॉक पर चल सकेंगे और समुद्र किनारे की जैव विविधता के बारे में जान सकेंगे।
वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक मैंग्रोव सेल के प्रमुख एन आर प्रवीण ने हाल ही में पार्क का दौरा किया और उसकी हालत देखी। सूत्रों का यह भी कहना है कि अधिकारी चाहते हैं कि पार्क दिवाली से पहले खुल जाए, ताकि छुट्टियों में स्कूल के बच्चे अपने परिवार के साथ यहां घूमने आ सकें। भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने कहा, "गोराई मैंग्रोव पार्क का उद्घाटन जल्द से जल्द किया जाएगा।"
पार्क का काम पूरा हुए छह महीने से ज्यादा बीत चुके हैं। यह मुंबई का अपनी तरह का पहला खुला पार्क है, फिर भी अब तक इसके दरवाजे लोगों के लिए नहीं खुले। उद्घाटन में देरी की वजह प्रशासनिक बताई गई है। मार्च में शिव सेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने महाराष्ट्र के वन मंत्री गणेश नाईक को चिट्ठी लिखकर पार्क का उद्घाटन जल्द करने की मांग की थी।
अब पार्क की खासियतें देखिए। यह पार्क गोराई में 8 हेक्टेयर में फैला है। इसमें 740 मीटर लंबा बोर्डवॉक बना है और इसे बनाने के लिए मैंग्रोव के पेड़ नहीं काटे गए। यहां प्रशिक्षित नेचुरलिस्ट के साथ गाइडेड मैंग्रोव ट्रेल की सुविधा रहेगी।
तटीय और मैंग्रोव इलाके के पक्षियों को देखने के लिए एक बर्ड ऑब्जर्वेटरी भी है। इसके अलावा मैंग्रोव के पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं की जानकारी देने वाला टच वाला VR सिस्टम लगाया गया है। यह राज्य के इको-टूरिज्म बोर्ड से मंजूर किया हुआ इको-टूरिज्म प्रोजेक्ट है। इसका मकसद मैंग्रोव की जैव विविधता और उसके संरक्षण के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाना है। प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 33.43 करोड़ रुपये है।
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