दिवाली वीकेंड पर मुंबई: जुहू में दीये की पेंटिंग, गिरगांव में सुवर्णदुर्ग की प्रतिकृति
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
जुहू रीड्स के सदस्य आज दीये रंगेंगे, गिरगांव के 17 साल के जय पाटिल ने गत्ते से सुवर्णदुर्ग बनाया, और शहर में खाने व थिएटर के भी कार्यक्रम आ रहे हैं।
दिवाली के वीकेंड में मुंबई के अलग-अलग कोनों से कुछ छोटी-बड़ी खबरें आई हैं। कहीं दीये रंगे जाएंगे, कहीं किला खड़ा हुआ है, और आने वाले दिनों में खाने और थिएटर के कार्यक्रम भी हैं।
कांदिवली ईस्ट के बांदोंगरी में बैटरी स्वैपिंग स्टेशन के एक स्लॉट पर ग्रेट एगफ्लाई तितली बैठी दिखी। सतेज शिंदे ने इसकी तस्वीर खींची।
जुहू रीड्स ग्रुप के लोग बरसों से हर शनिवार जुहू के कैफी आज़मी पार्क में इकट्ठा होकर अपनी पसंद की किताबें पढ़ते हैं। आज का शनिवार थोड़ा अलग होगा। दिवाली के वीकेंड को देखते हुए ग्रुप हमेशा की तरह चुपचाप पढ़ेगा, और साथ में हाथ से दीये भी पेंट करेगा। ग्रुप के को-क्यूरेटर शिशिर बांगेरा के मुताबिक हर कोई अपना दीया खुद डिज़ाइन करके घर ले जा सकेगा। उन्होंने बताया, "हमने पिछले साल भी ऐसा किया था और यह हर साल का एक मज़ेदार, त्योहारी हिस्सा बन गया है। बेशक, इसमें शामिल होना पूरी तरह अपनी मर्ज़ी पर है।"
मुंबई की नई पीढ़ी भी छुट्टियों को अपने ढंग से बिता रही है। गिरगांव के 17 साल के जय पाटिल ने पुराने ज़माने की दिवाली की एक परंपरा को फिर से ज़िंदा किया है। कॉलेज में पढ़ने वाले जय ने सुवर्णदुर्ग की 3 फुट x 1.5 फुट की प्रतिकृति बनाई है। सुवर्णदुर्ग वह मराठा किला है, जो 1660 के दशक में छत्रपति शिवाजी महाराज के लिए रणनीतिक तौर पर अहम गढ़ बना। महाराष्ट्र के किलों को याद करने की पुरानी रीत जय ने निभाई, लेकिन मिट्टी के बजाय गत्ते और टिश्यू पेपर से किला तैयार किया।
पाटिल परिवार के एक सदस्य ने बताया कि जय ने इस छोटे से ढांचे की प्लानिंग, आकार देने और आखिर में रंगाई में करीब 20 दिन लगाए। मुंबई के घरों में पुराने तरीके से किला बनाने लायक बड़ा आंगन भले न हो, पर गिरगांव ने परंपरा के लिए जगह निकाल ही ली।
खाने के शौकीनों के लिए 13 और 14 नवंबर को टोक्यो के स्ट्रीट फूड का स्वाद आ रहा है। मैगज़ीन स्ट्रीट किचन (MSK) दो दिन के पॉप-अप में दिल्ली के नई लहर के शेफ नविका कपूर और हितेन पुरी को बुलाएगा। दोनों दिल्ली के ज़ुरू ज़ुरू से हैं। यहां टोक्यो के सबसे चर्चित और असली स्वाद परोसे जाएंगे।
महालक्ष्मी के G5A में भी कुछ नया बन रहा है। आर्टिस्ट इन रेज़िडेंस सीज़न की शुरुआत थिएटर निर्देशक ज्योति डोगरा के साथ हो रही है। वे अपनी अगली प्रस्तुति "दरख़्त" पर काम शुरू करने शहर लौटी हैं। इससे पहले उनकी "मेज़ोक" पिछले साल इसी जगह खेली गई थी। नई प्रस्तुति एक औरत की कहानी है, जो जंगल से गुज़रती है और जहां अनजान रास्ते खुलते जाते हैं। वर्कशॉप चल रही हैं और प्रीमियर 12 नवंबर को तय है।
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