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आदिवासी 27 अक्टूबर को भिवंडी से मंत्रालय तक निकालेंगे विशाल मार्च, वन अधिकार दावों पर मांग

श्रमजीवी संघटना ने संविधान हक्क संघर्ष मोर्चा के बैनर तले भिवंडी से मंत्रालय तक मार्च का ऐलान किया है।

आदिवासी 27 अक्टूबर को भिवंडी से मंत्रालय तक निकालेंगे विशाल मार्च, वन अधिकार दावों पर मांग तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

ठाणे जिले के भिवंडी से दक्षिण मुंबई के मंत्रालय तक 27 अक्टूबर को आदिवासियों का मार्च निकलेगा। एक आदिवासी संगठन इस मार्च की अगुवाई करेगा। मार्च की मांग है कि वन अधिकार के लंबित दावों पर तय समय में कार्रवाई हो, सरकारी दस्तावेज़ों तक लोगों की पहुंच बने और आदिवासी बच्चों को मुफ्त और अच्छी शिक्षा मिले।

श्रमजीवी संघटना ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस आंदोलन का ऐलान किया। यह आंदोलन संविधान हक्क संघर्ष मोर्चा के बैनर तले होगा। संगठन का कहना है कि मार्च का मकसद आदिवासी समुदायों के बरसों से अटके मसलों पर राज्य सरकार से लिखित वादा हासिल करना है।

श्रमजीवी संघटना की सीता घाटल ने कहा कि संगठन सिर्फ ज़बानी भरोसे से संतुष्ट नहीं होगा और सरकार से साफ फैसले चाहता है। घाटल के मुताबिक, "आदिवासी समाज अब अस्पष्ट ज़बानी आश्वासन नहीं मानेगा। जब तक साफ लिखित फैसले नहीं मिलते, यह मार्च वापस नहीं लिया जाएगा। मुख्य मांगों में कक्षा 12 तक मुफ्त और अच्छी शिक्षा की गारंटी और इस बात का लिखित वादा शामिल है कि वन अधिकार कानून के सारे लंबित दावे इसी साल 15 दिसंबर तक पूरी तरह निपटा दिए जाएंगे।"

संगठन चाहता है कि सरकार वन अधिकार कानून के तहत लंबित दावों को निपटाने की पक्की समय-सीमा तय करे। साथ ही यह भी पक्का हो कि जो आवेदक पात्र हैं, उनकी अर्ज़ियों पर फैसला मिले।

ज़रूरी सरकारी दस्तावेज़ों की कमी भी संगठन का एक बड़ा मुद्दा है। घाटल ने बताया कि हज़ारों आदिवासियों के पास अब भी आधार कार्ड नहीं हैं। इससे उन्हें सरकारी सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं का फायदा लेने में दिक्कत आ सकती है।

यह मार्च दूरदराज़ के गांवों और बस्तियों में रहने वालों की मुश्किलों की तरफ भी ध्यान खींचना चाहता है। वहां सरकारी सेवाओं और प्रशासनिक मदद तक पहुंच सीमित हो सकती है।

घाटल के मुताबिक, श्रमजीवी संघटना को उम्मीद है कि कम से कम एक लाख लोग मार्च में शामिल होंगे। आदिवासी बस्तियों में तैयारियां चल रही हैं और महिलाएं मार्च में शामिल होने वालों के खाने का इंतज़ाम करने में हाथ बंटा रही हैं।

संगठन ने बताया कि इंतज़ाम संभालने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए 1,500 से ज़्यादा स्वयंसेवक तैनात किए जाएंगे। ये स्वयंसेवक मार्च में आने वालों के लिए पीने के पानी, साफ-सफाई और इलाज की मदद का भी इंतज़ाम देखेंगे। घाटल ने कहा कि बड़ी तादाद में आने वाली महिलाओं के लिए खास इंतज़ाम भी सोचे जा रहे हैं।

आयोजकों ने इस आंदोलन को सरकार पर ठोस फैसलों के लिए दबाव बनाने की कोशिश बताया है। आदिवासी समुदायों का कहना है कि ये मसले सालों से हल नहीं हुए हैं। मांगों में वन अधिकार दावों पर कार्रवाई और ज़रूरी दस्तावेज़ों तक पहुंच के साथ कक्षा 12 तक मुफ्त और अच्छी शिक्षा देने का वादा भी शामिल है।

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