वोटर लिस्ट से नाम कटने का आरोप, अलिबाग में कलेक्टर दफ्तर पर रायगड कांग्रेस का मोर्चा
रायगड कांग्रेस ने SIR में पात्र मतदाताओं के नाम हटने का आरोप लगाकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और स्वतंत्र जांच की मांग की।
रायगड जिला कांग्रेस कमेटी ने सोमवार को अलिबाग में SIR यानी विशेष सघन पुनरीक्षण प्रक्रिया के खिलाफ मोर्चा निकाला। कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए पात्र मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। पार्टी ने जिलाधिकारी कार्यालय पर यह मोर्चा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर निकाला।
मोर्चे की अगुवाई रायगड जिला कांग्रेस कमेटी (दक्षिण) के जिलाध्यक्ष राजाभाऊ ठाकूर ने की। सुबह 11 बजे अलिबाग के कर्वे रोड पर स्थित बै. ए. आर. अंतुले भवन यानी कांग्रेस भवन से मोर्चा शुरू हुआ। पार्टी के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और समर्थक बड़ी संख्या में शामिल हुए और नारे लगाते हुए जिलाधिकारी कार्यालय की तरफ बढ़े।
कांग्रेस की मांग है कि यह जांच हो कि पात्र नागरिकों के नाम गलत तरीके से तो नहीं हटाए जा रहे। आंदोलनकारियों ने यह भी कहा कि SIR में जितने मतदाता हटाए गए और जितने नए जोड़े गए, उनके सरकारी आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं। कांग्रेस ने मांग की कि जांच में गड़बड़ी मिले तो कानून के मुताबिक कार्रवाई हो और ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग के कामकाज पर भी सवाल उठाए। पार्टी ने दावा किया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के कुछ फैसलों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई थी। कांग्रेस ने अपने निवेदन में कहा है कि ये आपत्तियां SIR प्रक्रिया, मतदाता पंजीकरण और नाम हटाने, और आयोग की IT प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर थीं। इसी के आधार पर पार्टी ने आयोग की फैसले लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठाया। पार्टी का कहना है कि वोटर लिस्ट में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शक हो और नागरिक उसे खुद जांच सकें।
कार्यकर्ताओं ने 'आपका मत - आपका अधिकार' और 'भारतीय संविधान की रक्षा' के नारे लगाए। कांग्रेस का आरोप है कि भारतीय नागरिकों के मतदान के अधिकार पर चोट करके लोकतंत्र को सीमित किया जा रहा है।
जिलाधिकारी को दिए गए निवेदन में कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनकी भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग दोहराई। साथ ही पार्टी ने यह आधिकारिक जानकारी जारी करने को कहा कि SIR के दौरान कितने मतदाताओं के नाम हटाए गए, उनमें से कितनों ने आपत्ति दर्ज कराई और कितने नाम दोबारा वोटर लिस्ट में जोड़े गए।
इस बीच चुनाव आयोग ने स्पष्टीकरण दिया है कि आयोग के भीतर सवाल, सुझाव और आपसी चर्चा फैसले लेने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच बातचीत से मतभेद दूर हो गए हैं। आयोग के मुताबिक कांग्रेस के आरोप और मांगें पार्टी के राजनीतिक रुख का हिस्सा हैं, और इन बातों पर अंतिम नतीजा आधिकारिक रिकॉर्ड और स्वतंत्र जांच के आधार पर ही निकल सकता है।
देशभर में SIR को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा है। इसी बीच रायगड में कांग्रेस के सड़क पर उतरने से जिले का राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। वोटर लिस्ट में बदलाव, पात्र मतदाताओं के नाम कटने की आशंका और आयोग की फैसला प्रक्रिया की पारदर्शिता, इन्हीं मुद्दों को कांग्रेस ने इस आंदोलन में सबसे आगे रखा।