विहामांडवा में नौ महीने की गर्भवती और बच्चे की मौत, पति समेत चार पर पाचोड पुलिस में केस
पैठण तालुका के विहामांडवा में नौ महीने की गर्भवती महिला और पेट में पल रहे बच्चे की मौत हुई। इलाज में देरी का आरोप है और पाचोड पुलिस ने पति समेत चार लोगों पर केस दर्ज किया है।
छत्रपती संभाजीनगर जिले के पैठण तालुका में आने वाले विहामांडवा से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। आरोप है कि नौ महीने की गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ने के बाद भी उसे वक्त पर इलाज नहीं मिला। आखिर में महिला की और उसके पेट में पल रहे बच्चे की मौत हो गई।
मृत महिला का नाम स्वाती उर्फ समीक्षा विशाल निंबाळकर है। इस मामले में उनके पति, सास-ससुर और ननद के खिलाफ पाचोड पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप है कि ससुराल वालों ने इलाज का खर्च उठाने से मना कर दिया था।
शिकायत के मुताबिक स्वाती नौ महीने की गर्भवती थीं। 6 सितंबर को उनकी तबीयत बिगड़ी तो उन्हें एक प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया। वहां जांच में पता चला कि पेट में पानी की मात्रा कम हो गई है और पेट के बच्चे के गले के चारों तरफ नाल कस गई है। गर्भ में दिक्कत बढ़ रही थी, इसलिए बताया जाता है कि डॉक्टरों ने फौरन सिझेरियन करने की सलाह दी थी। इसके बावजूद आरोप है कि ससुराल वालों ने इलाज का खर्च करने से इनकार कर दिया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि स्वाती के मायके वालों ने इलाज का पूरा खर्च उठाने की तैयारी दिखाई थी। फिर भी उन्हें फौरन अस्पताल में भर्ती नहीं कराया गया। इस बीच उनकी हालत दिन-ब-दिन गंभीर होती गई। आखिरकार 25 सितंबर को उन्हें घाटी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज शुरू होने से पहले ही स्वाती की मौत हो गई। उनके पेट में नौ महीने का बच्चा भी नहीं बच सका।
इस मामले में पाचोड पुलिस ने स्वाती के पति विशाल अनिल निंबाळकर, ससुर अनिल निंबाळकर, सास शारदा निंबाळकर और ननद ऐश्वर्या निंबाळकर के खिलाफ केस दर्ज किया है। चारों विहामांडवा के रहने वाले हैं। ये सभी आरोप शिकायत में लगाए गए हैं और इनकी जांच चल रही है।
पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि स्वाती को ससुराल वालों की तरफ से मानसिक या शारीरिक तकलीफ दी जा रही थी या नहीं। पुलिस यह भी पता कर रही है कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने में ठीक-ठीक देरी क्यों हुई। इसके अलावा इस केस की मेडिकल हालत और मौत से जुड़ी बातों की भी जांच की जा रही है।
अब यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर वक्त पर मेडिकल इलाज मिल जाता तो क्या हालात कुछ और होते। इस घटना से विहामांडवा इलाके के साथ-साथ पूरे पैठण तालुका में शोक का माहौल है।