विदेश में नौकरी के लिए महाराष्ट्र सरकार देगी युवाओं को स्किल पासपोर्ट और भाषा ट्रेनिंग
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कामगार गतिशीलता पर हुई परिषद में सुरक्षित भर्ती व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए, वहीं भाषिणी, मित्रा और महिमा के बीच भाषा ट्रेनिंग को लेकर करार हुआ।
महाराष्ट्र के युवक-युवतियों को अब विदेश की बदलती नौकरी की मांग के हिसाब से तैयार किया जाएगा। राज्य सरकार ने तय किया है कि अलग-अलग देशों की जरूरत को देखते हुए हर देश के लिए अलग स्किल पासपोर्ट बनाया जाएगा, और आईटीआई समेत बाकी ट्रेनिंग संस्थाओं को अपने कोर्स अपडेट करने होंगे।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य की ग्लोबल वर्कफोर्स मोबिलिटी पॉलिसी के तहत विदेश में नौकरी के लिए सुरक्षित भर्ती सिस्टम बनाने के निर्देश दिए हैं। वे सह्याद्री अतिथीगृह में इंटरनेशनल लेबर मोबिलिटी पर हुई एक दिन की हाई लेवल परिषद में बोल रहे थे। यह परिषद महाराष्ट्र इन्स्टिट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन यानी मित्रा, राजशिष्टाचार विभाग, कौशल्य-रोजगार-उद्योजकता व नाविन्यता विभाग और महाराष्ट्र एजन्सी फॉर होलिस्टिक इंटरनेशनल मोबिलिटी एंड एडवांसमेंट यानी महिमा ने मिलकर करवाई थी।
फडणवीस ने कहा कि दुनिया भर में बदलती आबादी और बढ़ती उम्रदराज आबादी की वजह से कुशल मैनपावर की मांग तेजी से बढ़ रही है। भारत के युवा मैनपावर की ताकत को देखते हुए इसे दुनिया की मांग से जोड़ना जरूरी है, जिससे 'सर्क्युलर मोबिलिटी ऑफ टैलेंट' की सोच और मजबूत होगी और इसमें महाराष्ट्र अहम भूमिका निभाएगा।
भारत ने करीब २८ देशों के साथ कामगार गतिशीलता को लेकर करार किए हैं। इन देशों में इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर, कंस्ट्रक्शन और कई तकनीकी क्षेत्रों में कुशल मैनपावर की बड़ी मांग है। वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम की 'फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट २०२५' के मुताबिक २०३० तक दुनिया भर में करीब १७ करोड़ नई नौकरियां बनेंगी, जबकि करीब ९ करोड़ २० लाख नौकरियां खत्म हो जाएंगी। इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री ने साफ किया कि महाराष्ट्र इंटरनेशनल वर्कफोर्स मोबिलिटी में आगे रहेगा।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि रिक्रूटमेंट एजेंसियों के अनुभव का इस्तेमाल कर अलग-अलग देशों की मैनपावर जरूरत ट्रेनिंग संस्थाओं तक पहुंचाई जाए, पारंपरिक ट्रेनिंग के साथ डिजिटल और ऑफलाइन ट्रेनिंग दोनों मिलाकर दी जाए, और ऑनलाइन भाषा ट्रेनिंग के लिए तय समय सीमा, कम से कम टेस्ट और डिजिटल ट्रांसलेशन-इंटरप्रिटेशन टूल का इस्तेमाल हो।
राज्य सरकार के पॉलिसी ड्राफ्ट में स्किल डेवलपमेंट, दुनिया की मांग के हिसाब से ट्रेनिंग, भाषा ट्रेनिंग, सर्टिफिकेट, कागजात में मदद और विदेश जाने से पहले गाइडेंस को प्राथमिकता दी गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि विदेश से लौटे कुशल मैनपावर को राज्य की इंडस्ट्री से जोड़ने पर भी सरकार का जोर रहेगा।
युवाओं की भाषा से जुड़ी दिक्कतें दूर करने के लिए केंद्र सरकार की डिजिटल इंडिया भाषिणी, मित्रा और महिमा के बीच सामंजस्य करार हुआ है। ट्रांसलेशन टेक्नोलॉजी की मदद से उम्मीदवारों को विदेशी और प्रोफेशन से जुड़ी भाषाओं की फ्री और आसान ट्रेनिंग मिलेगी। इस पायलट प्रोजेक्ट का फायदा आईटीआई और पॉलिटेक्निक के स्टूडेंट्स को होगा।
राजशिष्टाचार मंत्री जयकुमार रावल ने कहा कि इंटरनेशनल लेबर मोबिलिटी सिर्फ मैनपावर के माइग्रेशन की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह स्किल, इन्वेस्टमेंट, प्रवासी भारतीय समुदाय और ग्लोबल मार्केट को जोड़ने वाली आर्थिक पार्टनरशिप है। मुंबई में विदेशी कॉन्सुलेट के नेटवर्क, इंडस्ट्री, यूनिवर्सिटी और स्किल डेवलपमेंट संस्थाओं को साथ लाकर महाराष्ट्र की टैलेंट को ग्लोबल मौकों से जोड़ा जाएगा।
कौशल्य, रोजगार, उद्योजकता व नाविन्यता मंत्री मंगल प्रभात लोढा ने कहा कि विदेश में नौकरी के लिए जरूरी स्किल और भाषा ट्रेनिंग के साथ-साथ सरकार स्टूडेंट्स को उस देश की लोकल कल्चर में घुलमिल पाने लायक बनाने पर भी जोर दे रही है। उनके मुताबिक, विदेश जाने वाले कामगार महाराष्ट्र और उन देशों के बीच दोस्ती को मजबूत करने वाले दूत की भूमिका भी निभाएंगे।