मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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20:18 IST

विदर्भ हॉकी एसोसिएशन को झटका, अपील खारिज, लीज रद्द करने का आदेश बरकरार

अपर विभागीय आयुक्त ने वीएचए की अपील खारिज कर कलेक्टर का आदेश कायम रखा।

विदर्भ हॉकी एसोसिएशन को झटका, अपील खारिज, लीज रद्द करने का आदेश बरकरार
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

अमरावती रोड के हॉकी मैदान के मामले में विदर्भ हॉकी एसोसिएशन (वीएचए) को बड़ा झटका लगा है। नागपुर विभाग के अपर विभागीय आयुक्त ने वीएचए की अपील खारिज कर दी है। अपील महाराष्ट्र जमीन राजस्व संहिता, 1966 की धारा 247 के तहत दायर की गई थी। आयुक्त ने कलेक्टर का वह आदेश कायम रखा है, जिसमें सरकारी नजूल जमीन का भाड़ेपट्टा रद्द करके जमीन शासन के कब्जे में लेने को कहा गया था। यह आदेश 28 सितंबर को दिया गया। इसके साथ 3.80 हेक्टेयर जमीन को लेकर वीएचए की अपील फिलहाल खारिज हो गई है।

यह जमीन अमरावती रोड पर मौजा गाडगा, तहसील और जिला नागपुर में है। खसरा क्रमांक 65/5 और नगर भूमापन क्रमांक 277 वाली यह सरकारी नजूल जमीन हॉकी के विकास और सार्वजनिक खेल सुविधाएं बनाने के मकसद से वीएचए को भाडेपट्टे पर दी गई थी। रिकॉर्ड के मुताबिक भाडेपट्टा 1962 से चला आ रहा है। 24 सितंबर 2007 के नवीनीकरण करार से इसे 23 सितंबर 2037 तक बढ़ाया गया था। करार में यह भी दर्ज है कि नवीनीकरण के बावजूद मूल भाडेपट्टे की शर्तें लागू रहेंगी।

मामला तब बिगड़ा जब कलेक्टर कार्यालय की नजूल शाखा ने मैदान की हालत पर रिपोर्ट मंगाई। जिला खेल अधिकारी ने 15 जून 2026 को निरीक्षण रिपोर्ट दी, जिसमें गंभीर आपत्तियां दर्ज थीं। रिपोर्ट के अनुसार मैदान की देखभाल संतोषजनक नहीं थी और जगह-जगह मिट्टी, पत्थर और कम घास दिखी। हॉकी के लिए जरूरी समतल सतह नहीं थी, और प्राकृतिक या कृत्रिम टर्फ की सुविधा भी नहीं थी।

मैदान के किनारों पर झाड़ियां, बढ़ी हुई वनस्पति और गंदगी मिली। खुली नालियां और टूटे हुए स्लैब मिले, जिनसे खिलाड़ियों को चोट लगने की आशंका जताई गई। बैठने की व्यवस्था पुरानी और नाकाफी बताई गई। गोलपोस्ट, मैदान की मार्किंग, ड्रेनेज, चेंजिंग रूम, शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं होने की बात कही गई। निष्कर्ष यह निकाला गया कि मैदान की नियमित और अच्छे स्तर की देखभाल नहीं हो रही थी।

इसी रिपोर्ट और नजूल शाखा की जांच के आधार पर वीएचए को 16 जून 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इसमें संस्था की वैधता, भाडेपट्टे की सभी शर्तों के पालन, फार्म-बीबी की शर्त क्रमांक 5 और मैदान में जरूरी हॉकी सुविधाओं के सबूत मांगे गए। भू-भाड़ा नियमित रूप से शासन के खाते में जमा नहीं किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया। इसके बाद कलेक्टर नागपुर ने 17 जुलाई को जमीन शासन के कब्जे में लेने का आदेश दिया था।

अपर विभागीय आयुक्त ने रिकॉर्ड, जिलाधिकारी का आदेश, निरीक्षण रिपोर्ट, भाडेपट्टा करार, वीएचए का जवाब और न्यायालयीन कार्यवाही को साथ रखकर देखा और जिलाधिकारी के निष्कर्षों से सहमति जताई। आदेश में कहा गया कि सिर्फ संस्था के पंजीकृत होने से वह सरकारी नजूल जमीन के भाडेपट्टे की स्वतंत्र शर्तों से मुक्त नहीं हो जाती। जमीन जिस खास सार्वजनिक खेल उद्देश्य के लिए दी गई है, उसी के हिसाब से उपयोग करना और जरूरी रखरखाव करना भाड़ेपट्टाधारक की जिम्मेदारी है।

आदेश में यह भी साफ किया गया कि हॉकी इंडिया और हॉकी महाराष्ट्र के बीच मान्यता या प्रशासन का विवाद अलग मुद्दा है। वह विवाद लंबित होने से नजूल जमीन के भाडेपट्टे की शर्तें निभाने की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। अपर आयुक्त ने यह भी माना कि कारण बताओ नोटिस देकर वीएचए को अपनी बात रखने का मौका दिया गया था और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन हुआ। मामले में 7 अगस्त, 2 सितंबर और 23 सितंबर 2026 को सुनवाई हुई। 23 सितंबर को मामला फैसले के लिए रखा गया, और 28 सितंबर 2026 को अपर विभागीय आयुक्त तुषार मठकर ने आदेश जारी किया।

अब सवाल है कि मैदान का आगे क्या होगा। अपर विभागीय आयुक्त के आदेश ने जिलाधिकारी का वह फैसला बरकरार रखा है, जिससे वीएचए की लीज खत्म करके जमीन शासन के कब्जे में लेने का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि आदेश के रिकॉर्ड में वीएचए की ओर से उच्च न्यायालय की कार्यवाही और दूसरे न्यायालयीन पहलुओं का भी जिक्र है। इसलिए विवाद का अगला चरण संबंधित न्यायालयीन और प्रशासनिक कार्यवाही पर निर्भर करेगा।

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