वर्धा: जबरी चोरी और मारपीट की वारदात चार घंटे में सुलझी, चार नाबालिग हिरासत में
वर्धा शहर पुलिस स्टेशन के गुन्हे प्रगटीकरण पथक ने पोस्टऑफिस चौक इलाके में हुई जबरी चोरी और मारपीट की घटना चार घंटे के भीतर सुलझाई।
वर्धा शहर में 20 सितंबर 2026 की रात करीब 8 से साढ़े 8 बजे के बीच एक फरियादी और उसका दोस्त मोपेड गाड़ी से पोस्टऑफिस चौक से गांधी पुतला की तरफ जा रहे थे। तभी पीछे से मोपेड पर आए दो अनजान लड़कों ने उनकी गाड़ी आड़ी लगाकर रोक ली और गाली-गलौज शुरू कर दी।
फरियादी ने अपने दोस्त को पुलिस को फोन करने के लिए कहा, लेकिन वहां पहले से एक दूसरी मोपेड पर बैठे दो और अनजान लड़कों ने फरियादी के दोस्त को पीटना शुरू कर दिया। दोस्त को बचाने के लिए फरियादी बीच में आया, तो चारों आरोपियों ने पहले हाथ-मुक्कों से मारपीट की। इसके बाद इनमें से एक ने धारदार हथियार से फरियादी के बाएं कान के नीचे और बाएं गाल पर वार कर उसे घायल कर दिया।
आरोपियों ने फरियादी के हाथ की उंगली से पन्ना जड़ित 05 ग्राम की सोने की गोल अंगूठी, जिसकी कीमत करीब 45,000 रुपये बताई गई है, जबरदस्ती खींचकर छीन ली। फरियादी के दोस्त को भी किसी धारदार हथियार से मारा गया। फरियादी की मौखिक रिपोर्ट और डॉक्टर की इंज्युरी रिपोर्ट के आधार पर पुलिस स्टेशन वर्धा शहर में अलग-अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुलिस स्टेशन वर्धा शहर के पुलिस निरीक्षक नागेशकुमार चतरकर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत गुन्हे प्रगटीकरण पथक के प्रमुख पुलिस उपनिरीक्षक शरद गायकवाड को जांच के निर्देश दिए। टीम ने फौरन जांच शुरू की और मिली जानकारी व उपलब्ध सबूतों के आधार पर घटना में शामिल चारों अनजान लड़कों का पता लगाया। जांच में सामने आया कि चारों विधिसंघर्षित बालक हैं। इसके बाद बाल न्याय अधिनियम के प्रावधानों के मुताबिक इन विधिसंघर्षित बालकों से घटना में इस्तेमाल धारदार हथियार यानी चाकू और दोनों मोपेड गाड़ियां जब्त कर उन्हें बाल सुधार गृह भेज दिया गया।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक सौरभकुमार अग्रवाल, अपर पुलिस अधीक्षक सदाशिव वाघमारे और उपविभागीय पुलिस अधिकारी सुनिल महाडिक तथा पुलिस निरीक्षक नागेशकुमार चतरकर के मार्गदर्शन में गुन्हे प्रकटीकरण अधिकारी पुलिस उपनिरीक्षक शरद गायकवाड और डी.वी. पुलिस अमलदार गजेंद्र धर्मे, नितीन ईटकरे, प्रशांत वंजारी, अभिजीत वाघमारे, नरेंद्र कांबळे, श्रावण पवार, रंजीत भुरसे और अमोल साळवन ने मिलकर की।