वडनगर-वाराणसी सेवा संकल्प यात्रा अमरावती के मोझरी पहुंची, रवींद्र चव्हाण मौजूद रहे
वडनगर से वाराणसी तक निकली सेवा संकल्प यात्रा शनिवार को अमरावती जिले के मोझरी स्थित गुरुकुंज आश्रम पहुंची, जहां पौधारोपण, सफाई कर्मचारियों के सम्मान और छात्रों को स्कूली सामान बांटने जैसे कार्यक्रम हुए।
वडनगर से वाराणसी तक निकाली गई 'सेवा संकल्प यात्रा' शनिवार को अमरावती जिले के मोझरी गांव पहुंची। भाजयुमो की तरफ से आयोजित इस यात्रा का स्वागत राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज के गुरुकुंज आश्रम में किया गया। यह पूरा कार्यक्रम भाजपा महाराष्ट्र प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण की मुख्य मौजूदगी में हुआ।
गुरुकुंज आश्रम पहुंचने के बाद रवींद्र चव्हाण ने राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज की समाधि और गादी के दर्शन किए। इस दौरान यात्रा में शामिल पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का भी स्वागत किया गया।
यात्रा के मौके पर गुरुकुंज आश्रम में कई सेवा कार्यक्रम रखे गए थे। कार्यक्रम की शुरुआत पौधारोपण से हुई। इसके बाद सफाई कर्मचारियों का सम्मान किया गया, वहीं छात्रों को स्कूली सामान बांटा गया। इन कार्यक्रमों के जरिए सेवा, समाजहित और गांव के विकास का संदेश सीधे काम करके दिखाने की कोशिश की गई।
इस मौके पर बोलते हुए रवींद्र चव्हाण ने राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज के गांव के विकास से जुड़े विचारों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज ने अपने लेखन और काम के जरिए लोगों की भागीदारी से गांव की तरक्की का जो विचार रखा था, वही विचार अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगे बढ़ा रहे हैं। चव्हाण ने यह भी अपील की कि समाज के आखिरी तबके तक जनकल्याण की योजनाओं का फायदा पहुंचाने के लिए लगातार काम करते रहना चाहिए।
वडनगर से वाराणसी तक निकाला गया यह सेवा संकल्प अभियान सेवा, सामाजिक कार्यक्रमों और लोगों से सीधे जुड़ने के मकसद से जोड़ा गया है। इस अभियान में सेवा, सफाई, पौधारोपण और सामाजिक जागरूकता जैसे कामों पर जोर दिया गया है।
मोझरी के इस कार्यक्रम में भाजपा और भाजयुमो के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद थे। इनमें प्रदेश महासचिव डॉ. संजय कुटे, सांसद डॉ. अनिल बोंडे, भाजयुमो अध्यक्ष कृष्णराज महाडिक के साथ-साथ अमरावती डिवीजन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी यात्रा के स्वागत के लिए पहुंचे।
सेवा कार्यक्रम, पौधारोपण, सफाई कर्मचारियों के सम्मान और छात्रों को स्कूली सामान बांटने जैसे कामों के जरिए यात्रा का सामाजिक संदेश आगे बढ़ाने की कोशिश की गई।