उत्तराखंड कांग्रेस में खींचतान, हरीश रावत से पार्टी ने यात्रा रोकने को कहा
उत्तराखंड चुनाव से पहले कांग्रेस नेतृत्व ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को अपनी यात्रा तुरंत रोकने के निर्देश दिए हैं।
नई दिल्ली : उत्तराखंड चुनाव से पहले कांग्रेस के अंदर गुटबाजी खुलकर सामने आती दिख रही है। पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हरीश रावत और पार्टी नेतृत्व के बीच सीधा टकराव बनता नजर आ रहा है।
बताया गया है कि रावत ने हाल ही में राज्य कांग्रेस कार्यकारिणी और केंद्रीय कांग्रेस कार्यकारिणी समिति की स्थायी सदस्यता से इस्तीफा देने की तैयारी जताई थी। इसके बाद उन्होंने पूरे राज्य में जनसंवाद और आभार प्रदर्शन रैली शुरू कर दी।
कांग्रेस नेतृत्व ने रावत को यह दौरा तुरंत रोकने के निर्देश दिए हैं। उनसे यह भी कहा गया है कि वे ऐसा कोई काम न करें जिससे पार्टी को नुकसान पहुंचे। प्रदेश कांग्रेस की प्रभारी और पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सेलजा ने भी इस बारे में रावत को चिट्ठी लिखकर अपना दौरा तुरंत रोकने की गुजारिश की है। चिट्ठी में कहा गया है कि रावत को कांग्रेस नेतृत्व के निर्देशों और कार्यक्रमों का इंतजार करना चाहिए। खबर है कि रावत ने फिलहाल दिल्ली आने से मना कर दिया है। उनका कहना है कि इतने दिनों तक जनता ने जो प्यार और समर्थन दिया, उसका शुक्रिया अदा करने के लिए वे यह यात्रा कर रहे हैं।
इस बीच, पार्टी ने उन्हें "धन्यवाद और सार्वजनिक संवाद यात्रा" आगे न बढ़ाने के लिए कहा। इसके बाद उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोमवार को अपने समर्थकों से यात्रा रोकने की अपील की। साथ ही उन्होंने समर्थकों से राज्य में बदलाव लाकर पार्टी को फिर से सत्ता में लाने का आह्वान किया। इससे पहले भी पार्टी उनसे यात्रा रोकने को कह चुकी थी। पार्टी का कहना है कि चुनाव से कुछ महीने पहले कोई भी समानांतर कार्यक्रम कांग्रेस के हित में नहीं होगा।
कांग्रेस की महासचिव और उत्तराखंड की प्रभारी कुमारी सेलजा ने चिट्ठी में रावत की यात्रा पर नाराजगी जताई। उन्होंने रावत के कुछ हालिया बयानों का भी जिक्र किया, जिनमें कहा गया है कि चुनाव को देखते हुए पार्टी को एकजुट होकर काम करने की जरूरत है। सेलजा ने लिखा कि उन्हें जानकारी मिली थी कि रावत राज्य में यात्रा निकाल रहे हैं, लेकिन इस बारे में न उनसे और न प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष से कोई बातचीत हुई थी। यह भी बताया गया है कि यात्रा रोकने से पहले रावत को सिर्फ अपने समर्थकों से बात करने के लिए वक्त चाहिए।
माना जा रहा है कि इस यात्रा के जरिए हरीश रावत कांग्रेस नेतृत्व को अपनी ताकत दिखा रहे हैं। राज्य के कुछ कांग्रेस विधायक भी उनकी यात्रा में शामिल हुए। यात्रा हाल ही में हरिद्वार इलाके से शुरू हुई, जहां से रावत सांसद भी रह चुके हैं।
कहा जा रहा है कि हाल के दिनों में राज्य की राजनीति में रावत की अनदेखी हो रही थी। उन्हें किसी बड़े फैसले में शामिल नहीं किया जाता था और राज्य में होने वाले किसी भी कार्यक्रम के लिए उनकी सहमति भी नहीं ली जाती थी। इसके पीछे वजह यह बताई जा रही है कि कांग्रेस नेतृत्व राज्य में नए चेहरों को आगे लाना चाहता है।