उमर खालिद और शरजील इमाम को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं, जमानत अर्जी खारिज
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्व दिल्ली में हुई हिंसा के पीछे कथित बड़ी साजिश वाले UAPA केस में दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों की जमानत अर्जी ठुकरा दी।
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्व दिल्ली में हुए दंगों के पीछे कथित बड़ी साजिश के UAPA केस में उमर खालिद और शरजील इमाम को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की बेंच ने 30 सितंबर को दोनों की जमानत अर्जियां खारिज कर दीं। दोनों 2020 से इस मामले में हिरासत में हैं।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि वह न्यायिक अनुशासन से बंधा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी 2026 को दिए अपने फैसले में खालिद और इमाम की जमानत को लेकर कुछ खास शर्तें तय की थीं। उनके मुताबिक दोनों को दोबारा जमानत की अर्जी देने की छूट तब मिलेगी, जब संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी हो जाए या 5 जनवरी 2026 के आदेश को एक साल पूरा हो जाए। इनमें से जो पहले हो, उसके बाद वे अर्जी दे सकते हैं। हाईकोर्ट ने साफ किया कि इन शर्तों में बदलाव करना उसके लिए मुमकिन नहीं है।
इससे पहले 4 जुलाई 2026 को कड़कड़डूमा कोर्ट ने भी दोनों की जमानत अर्जियां खारिज की थीं। उस अदालत ने भी कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के 5 जनवरी के आदेश का पालन करना जरूरी है। इसी फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की गई थी।
अब बात इस केस की। मामला फरवरी 2020 की उत्तर-पूर्व दिल्ली की हिंसा के पीछे बड़ी साजिश रचने के आरोपों से जुड़ा है। FIR नंबर 59/2020 में UAPA और तब की भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। दिल्ली पुलिस के अभियोजन का कहना है कि हिंसा अलग-अलग या अचानक हुई घटनाओं का नतीजा नहीं थी, बल्कि कथित बड़ी साजिश का हिस्सा थी।
खालिद और इमाम ने अदालती कार्रवाई में इन आरोपों को चुनौती दी है। इस मामले में दोष या निर्दोष होने का अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने भी साफ किया था कि जनवरी के फैसले में की गई टिप्पणियां सिर्फ जमानत अर्जी के स्तर तक हैं। उन्हें केस की मेरिट पर अंतिम राय नहीं समझा जाना चाहिए।