उल्हासनगर में 50 लाख की फिरौती के लिए अपहरण, मुख्य आरोपी सहित पांच गिरफ्तार
कल्याण के व्यवसायी को अगवा कर परिवार से फिरौती वसूली गई, पुलिस ने पांच आरोपियों को पकड़ा, दो अब भी फरार
उल्हासनगर पुलिस ने एक व्यवसायी के अपहरण और फिरौती के मामले का पर्दाफाश करते हुए मुख्य आरोपी सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। कल्याण में रहने वाले व्यवसायी जयराम नेहलानी को कुछ दिन पहले उल्हासनगर के गोल मैदान इलाके से अगवा कर लिया गया था।
पुलिस जांच के मुताबिक अपहरणकर्ताओं ने नेहलानी के परिवार से संपर्क कर उन्हें छोड़ने के बदले 50 लाख रुपये की फिरौती मांगी। व्यवसायी की जान को लेकर चिंतित परिवार वालों ने आरोपियों के कहे अनुसार कल्याण जाकर एक व्यक्ति को मांगी गई रकम सौंप दी।
बताया जा रहा है कि पैसे लेने के बाद उस व्यक्ति ने नेहलानी के रिश्तेदार को कहा कि जयराम कुछ ही देर में घर पहुंच जाएंगे, और फिर 'थैंक्यू अंकल' कहकर वहां से निकल गया।
इस अपहरण की खबर मिलते ही उल्हासनगर के डीसीपी सचिन गोरे के निर्देश पर पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी। आरोपियों को ढूंढने के लिए 10 अलग-अलग पुलिस टीमें बनाई गईं। इलाके के सीसीटीवी फुटेज, आरोपियों की गतिविधियों और तकनीकी जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ी।
सुराग जोड़ते हुए पुलिस खडवली इलाके पहुंची, जहां स्थानीय लोगों की मदद से तलाशी अभियान चलाया गया। आखिरकार पुलिस को जयराम नेहलानी का पता चला और उन्हें सुरक्षित छुड़ा लिया गया। इस कार्रवाई के दौरान एक संदिग्ध आरोपी को हिरासत में लिया गया, जिसकी पूछताछ से पुलिस को बाकी आरोपियों की जानकारी मिली।
आगे की जांच में सामने आया कि नेहलानी के परिचित इस्टेट एजेंट सचिन शिरसाट को इस अपहरण का कथित मुख्य सूत्रधार बताया जा रहा है। पुलिस के आरोप के अनुसार शिरसाट ने कुछ युवकों को साथ लेकर गैंग बनाई और नेहलानी के अपहरण की साजिश रची थी। घटना के बाद वह फरार हो गया था, लेकिन पुलिस ने उसे ढूंढकर गिरफ्तार कर लिया।
इस मामले में अनिल जगताप, विशाल चंद्रमोरे, रमेश जाधव, सचिन शिरसाट और राहुल सोनी नाम के पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं सतीश दोंदे और मयूर दराने नाम के दो संदिग्ध आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश के लिए पुलिस कई जगहों पर छानबीन कर रही है।
अपहरण के पीछे असल वजह क्या थी, आरोपियों ने इसकी प्लानिंग कैसे की, 50 लाख रुपये की फिरौती की रकम का आगे क्या हुआ, और इस मामले में और कौन-कौन शामिल हो सकता है, इन सब बिंदुओं पर उल्हासनगर पुलिस जांच कर रही है। साथ ही यह भी बताया गया है कि आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मोका) के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया की जाएगी।