मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:33 IST

सीजेपी नेता अभिजीत दिपके ने सीईसी ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा मांगा, वरना देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

कॉकरोच जनता पार्टी के अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे में इस्तीफा देने को कहा, ऐसा न होने पर 2 अक्टूबर से मुंबई से देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की।

सीजेपी नेता अभिजीत दिपके ने सीईसी ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा मांगा, वरना देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा मांगा है। दिपके ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे के अंदर अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए, और अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो कॉकरोच जनता पार्टी की तरफ से देशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा।

अभिजीत दिपके ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट डालकर यह मांग रखी। उनका कहना है कि अगर ज्ञानेश कुमार कल तक अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तो कॉकरोच जनता पार्टी 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती से एक बड़ा और तीखा देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी।

दिपके के मुताबिक इस आंदोलन की शुरुआत महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से होगी। मुंबई में बड़े आंदोलन के बाद यह मोहिम देश के दूसरे बड़े राज्यों और शहरों में भी फैलाई जाएगी। अपनी पोस्ट में अभिजीत दिपके ने देशवासियों से यह अपील भी की है कि इस गांधी जयंती पर सब लोग लोकतंत्र बचाने की शपथ लें।

अभिजीत दिपके ने अपनी पोस्ट में तीन मांगें रखी हैं। पहली मांग है कि ज्ञानेश कुमार फौरन इस्तीफा दें और उनके खिलाफ फौजदारी कार्रवाई की जाए। दूसरी मांग यह है कि देश के सभी राज्यों में होने वाले सभी आने वाले इलेक्शन तुरंत रोक दिए जाएं, जनवरी 2024 की वोटर लिस्ट फिर से लागू की जाए, और एसआईआर प्रोसेस भी फौरन बंद किया जाए। तीसरी मांग है कि निर्वाचन आयुक्तों को कानूनी कार्रवाई से बचाने वाला 2023 का कानून रद्द किया जाए और उसकी जगह सिविल सोसाइटी को शामिल करते हुए एक नया कानून लाया जाए।

यह पूरा विवाद वोटर लिस्ट से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर केंद्रीय निर्वाचन आयोग में पैदा हुए मतभेदों से जुड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीने में आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 लिखित आपत्तियां दर्ज की हैं। कहा जा रहा है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने संधू और जोशी की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए कई फैसले और आदेश उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना जारी किए। यह भी बताया गया है कि एक ही दिन में चार आपत्तियां दर्ज की गई थीं।

कानून के मुताबिक निर्वाचन आयोग के काम में जहां तक मुमकिन हो सहमति से फैसला होना चाहिए, और मतभेद होने पर बहुमत का फैसला माना जाना चाहिए। इस नियम के बावजूद दो निर्वाचन आयुक्तों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मनमाने ढंग से फैसले लेने का आरोप लगाया है। इसी वजह से देश भर में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नाराजगी की भावना देखी जा रही है।

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