शिवाजी पार्क में CJP का आंदोलन, दिपके बोले फडणवीस महाराष्ट्र की परंपरा न भूलें
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP ने मुंबई में आंदोलन का ऐलान किया था। आज 2 अक्टूबर से दादर के छत्रपती शिवाजी महाराज पार्क के गेट क्रमांक 6 के पास यह आंदोलन शुरू हो गया है।
CJP के अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने इस मौके पर कहा कि अपने अधिकारों के लिए लड़ना ही महात्मा गांधी को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है। उनके मुताबिक यह आंदोलन गांधीजी को वंदन है। दिपके ने आरोप लगाया कि अंग्रेजों ने गांधी को जितना परेशान नहीं किया था, उतना इन संघी लोगों ने लोगों को परेशान किया है। उन्होंने कहा कि गांधी कभी मर नहीं सकते, गांधी इस देश की आत्मा हैं।
दिपके ने कहा कि गोडसे जैसे हजारों लोग आएंगे और जाएंगे, गोडसे जैसे लोग डरपोक हैं। उनका कहना था कि यह देश गांधी के विचारों का है और गोडसे की विचारधारा वाले लोगों से वे कहना चाहते हैं कि गांधी को कोई खत्म नहीं कर सकता। इसके बाद उन्होंने कहा कि एक महाभाग खुद को नॉनबायोलॉजीकल कहता है, और हमें पता है कि आप इंसान नहीं हैं। दिपके के मुताबिक गांधी, नेहरू और आंबेडकर से तुलना करने की इनकी लायकी भी नहीं है।
उन्होंने कहा कि अगर गांधी देश की आत्मा हैं तो आंबेडकर भारत की रीढ़ हैं और जवाहरलाल नेहरू देश का मन हैं। दिपके ने कहा कि इनसे किसी की तुलना हो ही नहीं सकती और चुनाव जीतकर कोई उनसे बड़ा नहीं बन सकता। उनके अनुसार गांधी, नेहरू और आंबेडकर देश के लिए त्याग करके और आंदोलन करके बड़े हुए थे। जिन लोगों को अपने अधिकार तक पता नहीं थे, उन्हें इन नेताओं ने अधिकार दिलाए। दिपके ने आरोप लगाया कि आज की सरकार नागरिकों के अधिकार छीन रही है। उन्होंने सवाल किया कि आप देश को और कितना लूटेंगे, और कहा कि नोटबंदी और कोरोना के वक्त लोगों को सड़क पर लाइन में खड़ा कर दिया गया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का नाम लेकर दिपके ने कहा कि फडणवीस ने कहा था कि प्रोटेस्ट में गए तो तीन दिन जेल में जाना पड़ेगा। दिपके बोले कि आप महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री हैं और इस महाराष्ट्र की एक परंपरा है। उन्होंने कहा, फडणवीस साहेब, इस महाराष्ट्र की विरासत मत भूलिए। आप भूल गए होंगे, हम नहीं भूले। दिपके ने कहा कि फडणवीस साहेब, आप हमें जेल में डालना चाहते थे न, तो अब डाल दीजिए। यह चुनौती उन्होंने राज्य सरकार को दी।
दिपके ने यह भी कहा कि इस देश में जनता सरकार चुनती है, लेकिन इस नॉनबायोलॉजिकल महामानव के हिसाब से सरकार तय करेगी कि उसके वोटर कौन होंगे और कौन नहीं। उनका कहना था कि अगर पिछली सरकार ने यही किया होता तो आप आज भी चाय की दुकान पर चाय बेच रहे होते।