शिंदे ने दिल्ली में पीएम मोदी से की करीब एक घंटे बात, पुणे शिक्षक सीट पर महायुति में खींचतान
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दिल्ली दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। पुणे शिक्षक मतदारसंघ पर भाजपा और शिवसेना दोनों की नजर है।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे इन दिनों दिल्ली दौरे पर हैं और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है। जानकारी है कि मोदी और शिंदे के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई। इस मुलाकात में किन मुद्दों पर बात हुई, यह अभी तक आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है।
आने वाले विधान परिषद चुनावों को देखते हुए शिंदे के इस दिल्ली दौरे को अहम माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और राज्य की सूखे जैसी हालत पर भी इस बैठक में बात हुई होगी।
आगामी विधान परिषद चुनाव में पुणे शिक्षक और पुणे पदवीधर मतदारसंघ अहम रहने वाले हैं। इन दोनों मतदारसंघों पर भाजपा ने पहले से ही दावा किया हुआ था।
मंत्री चंद्रकांत पाटील ने कहा था कि ये दोनों सीटें भाजपा की ही हैं। मंत्री जयकुमार गोरे ने भी कहा था कि चुनाव महायुति के तौर पर लड़ा जाएगा, लेकिन जरूरत पड़ी तो भाजपा के तौर पर भी लड़ने की तैयारी है। इसके बाद उम्मीद के मुताबिक ये दोनों सीटें महायुति में भाजपा के हिस्से में जाती दिख रही हैं।
फिर भी पुणे शिक्षक मतदारसंघ को लेकर अब महायुति के अंदर ही एक नया मोड़ आ गया है। शिवसेना के मंगेश चिवटे इस मतदारसंघ से चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं।
सामने आई जानकारी के मुताबिक कहा जा रहा है कि एकनाथ शिंदे ने ही मंगेश चिवटे से पुणे विधान परिषद मतदारसंघ से नामांकन दाखिल करने को कहा है।
इसके बाद मंत्री उदय सामंत ने भी चिवटे की उम्मीदवारी का समर्थन किया। सामंत ने कहा था कि पुणे शिक्षक मतदारसंघ पर हमारा दावा है और यहां से मंगेश चिवटे नामांकन दाखिल करेंगे।
इन सब घटनाओं के बीच एकनाथ शिंदे और नरेंद्र मोदी की मुलाकात को अहम माना जा रहा है। विधान परिषद चुनाव में सीटों का बंटवारा, पुणे शिक्षक मतदारसंघ पर महायुति के भीतर किए जा रहे दावे और संभावित मंत्रिमंडल विस्तार जैसे मुद्दों पर बात हुई या नहीं, इस बारे में फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।
अब महायुति के घटक दलों समेत राजनीतिक गलियारों की नजर इस पर है कि मोदी और शिंदे की मुलाकात के बाद पुणे शिक्षक मतदारसंघ पर क्या फैसला होता है। यह देखना अहम होगा कि मंगेश चिवटे की उम्मीदवारी बनी रहती है या नहीं और भाजपा और शिवसेना के बीच का यह पेच कैसे सुलझता है।