सयाजी शिंदे का सवाल: पेड़ लगाने के लिए कानून की अड़चन क्यों, वन जमीन का अतिक्रमण नहीं दिखता?
फिल्म अभिनेता सयाजी शिंदे ने नागपुर जिले में देवराई के लिए जमीन न मिलने पर वन विभाग से सवाल किया है।
प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता और 'सह्याद्री देवराई फाउंडेशन' (Sahyadri Devrai Foundation) के प्रमुख सयाजी शिंदे ने प्रशासन से नाराजगी जताई है। उन्होंने सवाल उठाया है कि महाराष्ट्र में पेड़ लगाने के लिए परमिशन की जरूरत क्यों पड़ती है और वृक्ष लगाने के लिए कानून की बंदिश क्यों है। उनका यह भी सवाल है कि वन जमीन पर हुआ अतिक्रमण क्या वन विभाग (Forest Department) को दिखाई नहीं देता।
सह्याद्री देवराई फाउंडेशन के जरिए सयाजी शिंदे पश्चिम महाराष्ट्र समेत महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों में वृक्षारोपण (Devrai Project) के क्षेत्र में काम करते आए हैं। अब उन्होंने पूर्व विदर्भ में भी काम शुरू किया है। नागपुर जिले की कुछ ग्रामपंचायतों ने उनके साथ काम करने की इच्छा जताई है और गांव के पास देवराई के लिए प्रस्ताव दिए हैं।
सयाजी शिंदे का आरोप है कि वन विभाग के अधिकारी इस मामले में कानून पर जरूरत से ज्यादा जोर देकर अड़चनें खड़ी कर रहे हैं।
इसी सिलसिले में नागपुर जिले की 'बेला' ग्रामपंचायत ने अपने गांव के पास सयाजी शिंदे के फाउंडेशन के साथ मिलकर सह्याद्री देवराई के लिए वन विभाग से जगह मांगी है। वन विभाग ने बेला ग्रामपंचायत और फाउंडेशन की मांगी हुई जगह देने से इनकार कर दिया है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह जगह राखीव वनक्षेत्र है, इसलिए इसे देवराई के लिए नहीं दिया जा सकता और वहां वृक्षारोपण की परमिशन भी नहीं दी जा सकती।
इस पर सयाजी शिंदे और उनके साथियों का आरोप है कि जिस जगह को वन विभाग राखीव वनक्षेत्र बता रहा है, वहां कोई पेड़ नहीं है। उनका आरोप है कि उलटे कुछ लोगों ने उस जमीन पर अतिक्रमण करके नियमों के खिलाफ खेती शुरू कर दी है।
सयाजी शिंदे ने कुछ दिन पहले इसी मुद्दे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की थी। उन्होंने महाराष्ट्र में देवराई के लिए वन विभाग का सहयोग मांगा था। तब मुख्यमंत्री ने राज्य भर के सभी जिलाधिकारियों को एक पत्र दिया था, जिसमें सयाजी शिंदे के देवराई फाउंडेशन को नियम के मुताबिक सहयोग करने का निर्देश था।
सयाजी शिंदे का आरोप है कि इसके बावजूद वन विभाग के अधिकारी नियमों की आड़ लेकर वृक्षारोपण की प्रस्तावित पहल को रोक रहे हैं, जबकि अपनी जमीन पर हुए अतिक्रमण की उन्हें कोई फिक्र नहीं है।