संभाजीनगर महापालिका की ४० करोड़ की संपत्ति फेर-सर्वे की टेंडर प्रक्रिया आचार संहिता से रुकी
पदवीधर मतदारसंघ चुनाव की आचार संहिता लगने से छत्रपती संभाजी महापालिका के संपत्ति फेर-सर्वेक्षण का टेंडर काम अटक गया, फैसला अब आचार संहिता खत्म होने के बाद ही होगा।
पदवीधर मतदारसंघ की चुनाव आचार संहिता लगते ही छत्रपती संभाजी महापालिका के करीब ४० करोड़ रुपए के संपत्ति फेर-सर्वेक्षण की टेंडर प्रक्रिया बीच में ही रुक गई है। इस वजह से पूरा काम कम से कम एक महीने आगे खिसकने की संभावना है।
दरअसल महापालिका ने शहर की संपत्तियों का दोबारा सर्वे कर प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली को ज्यादा सटीक बनाने का फैसला किया था। संपत्तियों का रेकॉर्ड अपडेट कर टैक्स आकलन में जो गड़बड़ियां हैं, उन्हें दूर करने के मकसद से करीब ४० करोड़ रुपए का टेंडर निकाला गया था। पहली बार जो टेंडर बुलाया गया, उसे उम्मीद के मुताबिक रिस्पॉन्स नहीं मिला, इसलिए महापालिका को दोबारा टेंडर मांगने पड़े।
दूसरी बार निकाले गए टेंडर में अनिंट, पोर और स्थापत्य नाम की तीन एजेंसियों ने हिस्सा लिया। इन तीनों एजेंसियों का टेक्निकल बीड खोला भी जा चुका है। लेकिन इसके बाद जो टेक्निकल डॉक्युमेंट की जांच होनी थी और उसके आधार पर फाइनेंस बीड के लिए कौन-कौन सी एजेंसी पात्र है और कौन अपात्र, यह तय करने का काम आचार संहिता के चलते रुक गया है। यह काम अब आचार संहिता खत्म होने के बाद ही आगे बढ़ेगा।
आचार संहिता का असर सिर्फ इस टेंडर तक सीमित नहीं है, बल्कि महापालिका के प्रस्तावित नए विकास कामों पर भी इसका असर पड़ने वाला है। जो काम पहले से चल रहे हैं, उन पर सीधा फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन नए कामों के टेंडर निकालने, भूमिपूजन और लोकार्पण जैसे कार्यक्रम करने पर पाबंदी रहेगी। यानी चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक नए विकास कामों से जुड़े फैसले टलते रहेंगे।
आचार संहिता का असर महापालिका के राजनीतिक कामकाज पर भी दिख रहा है। सर्वसाधारण सभा, स्थायी समिति और अलग-अलग विषय समितियों की बैठकें अभी नहीं हो पाएंगी, इसलिए मंजूरी के इंतजार में पड़े मुद्दों पर कोई फैसला नहीं हो सकेगा। प्रशासन का रोजमर्रा का काम तो चलता रहेगा, लेकिन पदाधिकारी स्तर पर होने वाली फैसला लेने की प्रक्रिया पर ब्रेक लग गया है।
महापालिका अफसरों के मुताबिक शहर की संपत्तियों का यह फेर-सर्वे इसलिए जरूरी है ताकि संपत्ति और महापालिका की नीतियां आपस में मेल खाएं, संपत्ति टैक्स का आकलन अपडेट हो और वह ज्यादा सटीक बन सके। पहले टेंडर को अच्छा रिस्पॉन्स न मिलने के बाद ही दूसरी बार टेंडर मांगे गए थे, जिसमें तीन एजेंसियां शामिल हुईं, लेकिन आचार संहिता के कारण उनकी तकनीकी छानबीन आगे नहीं बढ़ पाई है।