सड़क हादसों में 7 की मौत, नागपुर ग्रामीण पुलिस ने इंजीनियर और ठेकेदारों पर केस दर्ज किया
नागपुर ग्रामीण पुलिस ने सड़क की खामियों से हुए दो हादसों में 7 मौतों के बाद सरकारी इंजीनियरों और ठेकेदारों को आरोपी बनाया है।
नागपुर जिले में सड़कों के अधूरे काम, गड्ढों और सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी अब जानलेवा साबित हो रही है। आम तौर पर ऐसे हादसों के बाद वाहन चालक को ही जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है।
इस बार नागपुर ग्रामीण पुलिस के एसपी हर्ष पोद्दार ने सख्त कदम उठाया है। सड़क की खामियों की वजह से हुए 2 हादसों में 7 लोगों की मौत हुई। इसके बाद पुलिस ने सीधे उन सरकारी इंजीनियरों और ठेकेदारों को आरोपी बनाया है, जिन पर सड़क की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी थी।
दोनों मामले बूटीबोरी और उमरेड पुलिस थाने में दर्ज हुए हैं। पुलिस की जांच में सामने आया कि सड़क बनाने के दौरान जरूरी सुरक्षा उपाय किए ही नहीं गए थे। कहीं सड़क पर मार्किंग और डिलिनेटर नहीं लगाए गए थे, तो कहीं खतरनाक गड्ढों की जानकारी होने के बावजूद उन्हें भरा नहीं गया।
उमरेड-भिवापुर मार्ग पर हुए हादसे की वजह सड़क पर बने गड्ढे सामने आए। खास बात यह है कि संबंधित विभाग को सड़क की खराब और जोखिम भरी हालत की जानकारी पहले ही दे दी गई थी। गड्ढे भरने और हादसे की आशंका वाले हिस्से में सुरक्षा उपाय करने के लिए लोक निर्माण विभाग से पत्राचार भी किया गया था।
इसके बावजूद गड्ढे जस के तस रहे और सुरक्षा इंतजाम नहीं हुए। इस मामले में जूनियर इंजीनियर सचिन आवले और सेठ कंस्ट्रक्शन को सह-आरोपी बनाया गया है।
दूसरा हादसा बूटीबोरी में एमआईडीसी-बूटीबोरी मार्ग पर हुआ। जांच में पुलिस ने पाया कि इस सड़क पर पर्याप्त रोड मार्किंग और डिलिनेटर नहीं थे। इसी मार्ग पर मेट्रो का काम भी चल रहा है। पुलिस के अनुसार, मेट्रो और सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड के अधीन की जा रही थी।
जांच अधिकारी पीआई निशांत मेश्राम ने सुरक्षा इंतजामों की कमी को गंभीरता से लिया। उन्होंने एमआईडीसी डिवीजन की सहायक अभियंता मनीषा सुनील आकुलवार और कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर आशीष लोधी के खिलाफ मामला दर्ज किया। दोनों के खिलाफ बीएनएस की धारा 281 और 106(1) और मोटर वाहन अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।