रोहित पवार की चेतावनी: मदद न मिली तो समृद्धी महामार्ग जाम करेंगे
एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने राज्य सरकार को 12 अक्टूबर तक की डेडलाइन दी है
राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) गुट के विधायक रोहित पवार ने सोमवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य के कई तालुकाओं में सूखा घोषित तो कर दिया गया, लेकिन सूखाग्रस्त किसानों और खेतमजदूरों को आर्थिक मदद मिलने में देर हो रही है।
रोहित पवार ने साफ चेतावनी दी कि अगर 12 अक्टूबर तक सही उपाय और आर्थिक मदद का ऑफिशियल बंटवारा नहीं हुआ, तो पार्टी के कार्यकर्ता सूखाग्रस्त किसानों और खेतमजदूरों के साथ मिलकर समृद्धी महामार्ग एक्सप्रेसवे पर चक्का जाम करेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि मंगलवार को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में अगर किसानों के लिए आर्थिक पैकेज घोषित नहीं हुआ, तो महामार्ग पर राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। रोहित पवार के मुताबिक यह आंदोलन सिर्फ एक दिन का नहीं होगा, बल्कि 12 से 15 अक्टूबर के बीच समृद्धी महामार्ग पर लगातार आंदोलन चलाया जाएगा।
रोहित पवार ने दावा किया कि राज्यभर के किसानों का कुल 35,900 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है, जिसमें अकेले विदर्भ के किसानों का नुकसान 22,400 करोड़ रुपये है। उन्होंने राज्य सरकार की तरफ से जारी सूखाग्रस्त तालुकाओं की लिस्ट पर भी सवाल उठाए। केंद्र सरकार की वेबसाइट के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार सूखाग्रस्त तालुकाओं की संख्या कम करके दिखा रही है।
रोहित पवार ने इस लिस्ट में गड़बड़ी की बात कही। उनके मुताबिक जिन तालुकाओं में अच्छी बारिश हुई, उन्हें भी सूखाग्रस्त लिस्ट में शामिल कर लिया गया है, जबकि जहां बारिश कम हुई जैसे नाशिक, जामखेड और उनका अपना निर्वाचन क्षेत्र कर्जत-जामखेड, वहां को इस लिस्ट में जगह ही नहीं दी गई।
रोहित पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मांग की कि लंबी प्रशासनिक देरी और पेचीदा पात्रता शर्तों से बचा जाए, और किसानों को तुरंत और बड़े पैमाने पर आर्थिक मदद दी जाए।
उन्होंने दिवाली से पहले विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन, ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) के तहत मजदूरी देने, मिट्टी के कटाव से हुए नुकसान की पूरी भरपाई करने, प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर तुरंत आर्थिक मदद देने, और भूमिहीन खेतमजदूरों को सीधे आर्थिक अनुदान और आपातकालीन कृषी सहायता देने को प्राथमिकता देने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने लंबे समय के विकास खर्च में वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की भी अपील की।