मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:40 IST

पूर्व विधायकों की Rs 50 हजार आजीवन पेंशन को हाईकोर्ट में चुनौती, नागपुर खंडपीठ ने याचिका ली

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने पूर्व विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की पेंशन के खिलाफ जनहित याचिका सुनवाई के लिए मंजूर की।

पूर्व विधायकों की Rs 50 हजार आजीवन पेंशन को हाईकोर्ट में चुनौती, नागपुर खंडपीठ ने याचिका ली
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

महाराष्ट्र के पूर्व विधायकों और विधान परिषद सदस्यों को हर महीने Rs 50 हजार की आजीवन पेंशन मिलती है। इस व्यवस्था को अब बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में चुनौती दी गई है। कोर्ट ने यह जनहित याचिका सुनवाई के लिए मंजूर कर ली है। न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति रजनीश व्यास की खंडपीठ ने 23 सितंबर को इस मामले में आदेश जारी किया।

याचिका चारुदत्त विनायक सहजे ने दायर की है। उन्होंने महाराष्ट्र विधानमंडल पेंशन अधिनियम, 1976 की धारा 3(1) को असंवैधानिक बताया है। उनकी मांग है कि इस धारा को रद्द किया जाए या उसमें जरूरी बदलाव किए जाएं।

याचिका में दावा किया गया है कि मौजूदा व्यवस्था में कोई भी व्यक्ति विधायक या विधान परिषद सदस्य के तौर पर शपथ लेते ही पेंशन का हकदार हो जाता है। इसके लिए न कोई न्यूनतम सेवा अवधि तय है और न ही सदस्य को पेंशन के लिए अपनी तरफ से कोई अंशदान देना पड़ता है।

याचिकाकर्ता ने इसी बात पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि एक दिन विधायक रहने वाले और पांच साल का पूरा कार्यकाल निभाने वाले सदस्य, दोनों को शुरुआत में बराबर Rs 50 हजार मासिक पेंशन मिलती है।

मौजूदा प्रावधान के मुताबिक पांच साल से ज्यादा सेवा होने पर हर अतिरिक्त साल के लिए Rs 2 हजार प्रतिमाह और जुड़ते हैं। याचिका में इसे कानून की अंदरूनी विसंगति बताया गया है और संविधान के अनुच्छेद 14 में दिए समानता के अधिकार के हवाले से चुनौती दी गई है।

याचिकाकर्ता ने सरकारी कर्मचारियों की पेंशन का हवाला भी दिया है। उन्होंने कहा है कि 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए अंशदायी पेंशन व्यवस्था लागू की गई है, जबकि पूर्व विधायकों के लिए बिना न्यूनतम सेवा अवधि और बिना अंशदान के पेंशन का प्रावधान है।

हाईकोर्ट से मांग की गई है कि धारा 3(1) रद्द की जाए, या उसमें संशोधन कर न्यूनतम सेवा अवधि तय की जाए और पेंशन को सदस्य के असल कार्यकाल के अनुपात में रखा जाए। साथ ही याचिका में यह मांग भी है कि गंभीर अपराध या कदाचार में दोषी ठहराए जाने पर पूर्व विधायक या विधान परिषद सदस्य की पेंशन रोकने का प्रावधान हो।

याचिकाकर्ता की तरफ से एड. तुषार मंडलेकर ने पैरवी की। राज्य सरकार की ओर से एड. कल्याणी मारपकवार ने पक्ष रखा।

याचिका में आरटीआई से मिली जानकारी का भी जिक्र है। इसके मुताबिक राज्य सरकार पूर्व विधायकों, विधान परिषद सदस्यों और उनके परिवारों की पेंशन पर हर साल करीब Rs 82.98 करोड़ खर्च कर रही है। आरटीआई में 19 मई 2026 तक के आंकड़ों के हिसाब से राज्य में 630 पूर्व विधायक, 144 पूर्व विधान परिषद सदस्य और 596 परिवार पेंशनधारक हैं।

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