मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:21 IST

पुणे कोर्ट ने शिक्षिका और व्यवसायी की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज की, खाते से 149 करोड़ का लेन-देन

पुणे की अदालत ने फर्जी दस्तखत और डिजिटल सिग्नेचर के गलत इस्तेमाल के आरोप वाले मामले में दो आरोपियों की अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज कर दी।

पुणे कोर्ट ने शिक्षिका और व्यवसायी की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज की, खाते से 149 करोड़ का लेन-देन
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

पुणे की अदालत ने करोड़ों रुपये के लेन-देन के मामले में एक महिला शिक्षिका और एक व्यवसायी की अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज कर दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मोरेश्वर कुलकर्णी ने यह आदेश दिया।

अदालत ने अपने आदेश में दर्ज किया कि संबंधित कंपनी के खाते से आरोपियों से जुड़ी कंपनियों के खातों में बड़ी रकम जमा होती दिख रही है। इन आर्थिक लेन-देन की जांच वस्तु एवं सेवा कर विभाग (जीएसटी) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी कर रहे हैं।

मामला सरकारी टेंडर भरकर काम करने वाली एक कंपनी के बैंक खाते का है। सामने आया है कि इस खाते से डिजिटल सिग्नेचर के गलत इस्तेमाल और फर्जी दस्तखत के जरिए गड़बड़ी की गई। जिनकी अग्रिम जमानत खारिज हुई, उनके नाम अपर्णा वैद्य और प्रमोद तलवार हैं। इन दोनों समेत कुल छह लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और सूचना-प्रौद्योगिकी कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है। बाकी चार में मुख्य आरोपी कमलदीप अमरिकसिंग वैद्य, चार्टर्ड अकाउंटेंट अमर प्रमोद तलवार, सर्जेराव जेधे और दिग्विजय जेधे शामिल हैं।

शिकायत खराडी की एक निजी कंपनी चलाने वाले ने दी है। घटना 2023 से लेकर मामला दर्ज होने तक के दौरान की बताई गई है। शिकायतकर्ता को कर्ज की जरूरत थी, इसलिए मुख्य आरोपी कमलदीपसिंह ने उनकी पहचान सीए अमर तलवार से कराई।

शिकायतकर्ता से एक निजी बैंक की औंध शाखा में खाता खोलने को कहा गया। साथ ही शिकायतकर्ता और उनकी पत्नी से डिजिटल सिग्नेचर वाली पेन ड्राइव और सिम कार्ड ले लिए गए। फरवरी 2024 में शिकायतकर्ता ने एक सहकारी बैंक से आठ करोड़ रुपये का कर्ज लिया और सोलह डंपर ट्रक खरीदे। ये ट्रक सरकारी टेंडर के कामों में इस्तेमाल होते थे।

शिकायत के मुताबिक इनमें से 14 ट्रक जून 2024 में सर्जेराव जेधे और दिग्विजय जेधे को दिए गए। जुबानी करार यह था कि हर ट्रक का किराया रोजाना 24 हजार रुपये मिलेगा। शिकायतकर्ता का आरोप है कि किराया नहीं दिया गया और उन्हें संबंधित लोगों से धमकियां मिलीं। इसके बाद नवंबर 2024 में उन्हें जीएसटी दफ्तर से नोटिस आया, जिससे पता चला कि उनके बैंक खाते से 149 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ है।

अग्रिम जमानत की अर्जी अपर्णा वैद्य और प्रमोद तलवार ने लगाई थी। आरोपियों के वकीलों ने दलील दी कि मामला दर्ज करने में सोलह महीने की देरी हुई। अदालत ने यह दलील नहीं मानी। अदालत ने कहा कि मामले की जांच जारी है और आरोपियों से जुड़ी कंपनियों के खातों में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है। जीएसटी और ईडी की जांच का हवाला देते हुए अदालत ने आरोपियों से हिरासत में पूछताछ की जरूरत भी बताई।

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