मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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21:31 IST

प्रजनन दर घटा, नसबंदी के नियम बदलने की सिफारिश; EAC-PM की बड़ी रिपोर्ट

देश में प्रजनन दर लगातार घट रही है, इसलिए प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने नसबंदी और दो बच्चों के नियमों को लेकर बड़ी सिफारिश की है।

प्रजनन दर घटा, नसबंदी के नियम बदलने की सिफारिश; EAC-PM की बड़ी रिपोर्ट
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

देश में प्रजनन दर लगातार नीचे आ रहा है, यह सामने आने के बाद प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) ने इस पर एक महत्त्वपूर्ण रिपोर्ट दी है। इस रिपोर्ट में नसबंदी सर्जरी के लिए दिया जाने वाला प्रोत्साहन और मजदूरी भरपाई बंद करने की सिफारिश की गई है। साथ ही दो बच्चों के नियम के तहत लागू सभी अपात्रता की शर्तें हटाने की सलाह भी परिषद ने दी है।

परिषद के मुताबिक, स्थायी परिवार नियोजन के तरीकों के लिए दिया जाने वाला प्रोत्साहन बंद कर देना चाहिए। नसबंदी करवाने वालों को उनकी डूबती हुई मजदूरी की जो भरपाई दी जाती है, वह भी रोक देनी चाहिए। सेवा देने वालों को दिया जाने वाला अतिरिक्त प्रोत्साहन भी वापस ले लेना चाहिए, ऐसा परिषद ने सुझाया है। इसके साथ ही परिवारों को दो बच्चों तक सीमित रखने के लिए दिया जाने वाला आशा प्रोत्साहन भी रद्द करने की सिफारिश इस रिपोर्ट में की गई है।

परिषद के आंकड़ों के मुताबिक भारत का कुल प्रजनन दर १.९ है, जो प्रतिस्थापन स्तर से कम है। बिहार और उत्तर प्रदेश को छोड़कर देखा जाए तो यह दर और नीचे, १.६ पर आ जाता है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, बंगाल, पंजाब और दिल्ली इन राज्यों में तो प्रजनन दर पिछले दो दशकों से ज्यादा समय से प्रतिस्थापन स्तर से नीचे है।

परिषद ने परिवार नियोजन से जुड़े पुरस्कार और विश्व जनसंख्या दिवस, नसबंदी पखवाड़ा जैसे जनसंख्या नियंत्रण पर जोर देने वाले कार्यक्रम बंद करने की भी सिफारिश की है। बदलती जनसांख्यिकीय स्थिति के मुताबिक परिवार विकास अभियान का दायरा बढ़ाना चाहिए और राष्ट्रीय के साथ साथ राज्य स्तर की नीतियों से प्रजनन दर में गिरावट, जनसंख्या नियंत्रण और स्थिरीकरण से जुड़ी भाषा हटा देनी चाहिए, ऐसा भी परिषद ने सुझाया है।

परिषद की रिपोर्ट के मुताबिक साल २००१ में देश में सालाना जन्मों की संख्या करीब २.९३ करोड़ थी, जो २०२३ में घटकर लगभग २.३२ करोड़ पर आ गई। यानी जन्मसंख्या में करीब २० प्रतिशत गिरावट आई है। २०२३ की सालाना जन्मसंख्या करीब ५० साल पहले, यानी १९७४ के स्तर जितनी नीचे आ गई है।

तुलना के लिए देखा जाए तो उत्तरी यूरोप का प्रजनन दर १.५ और अमेरिका का प्रजनन दर १.६ है। देश के अलग अलग राज्यों का कुल प्रजनन दर भी परिषद ने दिया है। इसमें पंजाब १.४, हिमाचल प्रदेश १.५, सिक्किम १.०, दिल्ली १.२, महाराष्ट्र १.४, पश्चिम बंगाल १.३, गोवा १.६, कर्नाटक १.५, केरल १.३, तेलंगाना १.५, आंध्र प्रदेश १.४ और तमिलनाडु १.३ इतना दर दर्ज किया गया है।

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