मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:39 IST

पारडी में करोड़ों का फायर स्टेशन बना, पर चाबी और स्टाफ दोनों गायब

नागपुर में नए फायर स्टेशन तो बन गए, लेकिन कर्मचारियों की कमी की वजह से इन पर ताले लटके हैं।

पारडी में करोड़ों का फायर स्टेशन बना, पर चाबी और स्टाफ दोनों गायब
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नागपुर शहर को आग से बचाने के लिए नगर निगम ने करोड़ों रुपए खर्च करके नए फायर स्टेशन तो खड़े कर दिए, मगर हकीकत में इन पर ताले लटके हुए हैं। वजह सीधी है, आग बुझाने वाले दमकलकर्मी और गाड़ी चलाने वाले ड्राइवर ही वहां मौजूद नहीं हैं।

स्टाफ की भारी कमी के बावजूद सिर्फ चुनावी श्रेय और राजनीतिक फायदे के चक्कर में इन स्टेशनों का उद्घाटन जल्दबाजी में करा दिया गया, जबकि इंतजाम अधूरे ही थे। सुगत नगर, वाठोड़ा और पारडी में बने इन नए अग्निशमन केंद्रों पर आधुनिक गाड़ियां और उपकरण यूं ही धूल खा रहे हैं।

कमाल टॉकीज के पास मौजूद करीब 50-60 साल पुराना पांचपावली फायर स्टेशन आरा मशीन इलाके की सुरक्षा के लिए खासतौर पर बनाया गया था। इमारत जर्जर हो जाने पर इसे खाली करके 2 साल पहले बनी सुगत नगर की नई बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिया गया, लेकिन वहां पर्याप्त स्टाफ की तैनाती अब तक नहीं हो पाई।

इसी तरह लकड़गंज, सक्करदरा और डंपिंग यार्ड से सटे इलाके की सुरक्षा के लिए वाठोड़ा में दमकल केंद्र बनकर तैयार हुआ, लेकिन कोर्ट-कचहरी के विवाद में देरी होते-होते जब तक निर्माण पूरा हुआ, तब तक वहां काम कर रहे कर्मचारी रिटायर हो चुके थे। इसके बावजूद 'स्टेशन खोलो और चार्ज लो' की होड़ में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और उस वक्त के व्यवस्थापकों के दबाव में अफसरों ने बिना कर्मचारियों के ही इसका उद्घाटन जबरन करा दिया।

वहीं पारडी में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बना फायर स्टेशन आधुनिक सुविधाओं और क्वालिटी के लिहाज से बेहतरीन है, लेकिन यहां भी हाल कुछ अलग नहीं। उपकरण और गाड़ियां तो खड़ी हैं, पर उन्हें चलाने और इमरजेंसी में मौके पर पहुंचने वाला स्टाफ नदारद है।

फिलहाल स्थिति यह है कि तीन-चार गाड़ियां सिर्फ पुराने और बड़े स्टेशनों पर ही खड़ी रहती हैं। अगर नए स्टेशनों पर स्टाफ की तैनाती हो जाए तो इन गाड़ियों को सुगत नगर, वाठोड़ा और पारडी में एक-एक करके बांटा जा सकता है। विभाग इस वक्त ड्राइवर और फायरमैन दोनों की भारी कमी से जूझ रहा है, और कई जगह तो एक ही आदमी को ड्राइवर और फायरमैन दोनों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है।

राहत की बात यह है कि ड्राइवर और फायरमैन मिलाकर करीब 91-100 नए पदों पर भर्ती की प्रक्रिया आखिरी दौर में है। लेकिन जब तक यह नया स्टाफ ट्रेनिंग पूरी करके सीधे काम पर नहीं उतरता, तब तक इन नए-नवेले स्टेशनों से शहरवासियों को असली राहत मिलना मुश्किल ही लग रहा है।

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