पालघर पीडब्ल्यूडी में 73 लाख का घपला, फर्जी दस्तावेज बनाकर FIR टाली गई
जव्हार पीडब्ल्यूडी में फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी पैसा हड़पने का मामला सामने आया, पुलिस अधीक्षक के आदेश के बावजूद FIR दर्ज करने में देरी हो रही है।
पालघर जिले के जव्हार सार्वजनिक बांधकाम विभाग यानी पीडब्ल्यूडी में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। सुशिक्षित बेरोजगार इंजीनियरों के नाम पर होने वाले कामों के फर्जी दस्तावेज तैयार करके 73 लाख 13 हजार 884 रुपए का सरकारी पैसा सीधे हड़प लिया गया।
पालघर के पुलिस अधीक्षक यतीश देशमुख ने खुद 28 अगस्त को इस मामले में जव्हार पुलिस स्टेशन में तुरंत बाकायदा केस दर्ज करने का साफ आदेश दिया था। लेकिन ठाणे मंडल के अधीक्षक इंजीनियर से मार्गदर्शन और राय मांगे जाने का बहाना बनाकर FIR दर्ज करने की प्रक्रिया अब तक लटकाई जा रही है।
पुलिस अधीक्षक जैसे बड़े अफसर के आदेश को नजरअंदाज करके एक बड़े राजनीतिक रसूख वाले ठेकेदार को बचाने के लिए ही यह "राय" वाला बहाना बनाया जा रहा है, ऐसा शक अब गहरा गया है। पीडब्ल्यूडी जव्हार की बी-1 रजिस्टर बुक में 2014-15 में सुशिक्षित बेरोजगार इंजीनियरों के नाम करार नंबर 331, 332, 334, 335, 336, 337 और 344 के तहत सात कामों के कार्यादेश बाकायदा दिए गए थे।
प्रशासकीय मंजूरी 2014-15 की थी, लेकिन ये काम असल में 2015-16 के दौरान पूरे हुए। काम पूरा होने के बावजूद पीडब्ल्यूडी के पास फंड न होने का बहाना बनाकर इन युवा इंजीनियरों के बिल साल दर साल लटकाए जाते रहे। इसके बाद 31 मार्च 2019 को वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन एक बड़ा प्रशासनिक गोलमाल किया गया। संबंधित मूल फाइलों के शुरुआती कुछ पन्ने बदल दिए गए, कैश बुक और ऑनलाइन कैशबुक में फर्जी हेरफेर किया गया। असली सुशिक्षित बेरोजगारों को दरकिनार करके यह पूरे 73 लाख 13 हजार 884 रुपए सीधे विक्रमगड की "मे. जिजाऊ कंस्ट्रक्शन" कंपनी के खाते में ट्रांसफर कर दिए गए।
पालकमंत्री गणेश नाईक ने कहा कि सरकारी बिलों की फाइल में गलत तरीके से हेरफेर करके पैसा हड़पना सीधा-सीधा घोटाला और नाकाबिले माफी अपराध है। पैसा बाद में वापस तिजोरी में जमा कर दिया गया इसका मतलब यह नहीं कि भ्रष्टाचार या घपले का आरोप मिट जाए। उन्होंने पीडब्ल्यूडी के अधीक्षक इंजीनियर को संबंधित लोगों पर बिना देर किए केस दर्ज करने का साफ आदेश दिया है और कहा कि अगर कार्यकारी इंजीनियर स्तर पर जानबूझकर केस दर्ज करने में टालमटोल पाई गई तो संबंधित अफसरों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी, ऐसे आदेश जिला प्रशासन को दिए गए हैं।
वहीं पीडब्ल्यूडी जव्हार के कार्यकारी इंजीनियर संजय डोंगरे ने कहा कि इस मामले में बाकायदा केस दर्ज करने के लिए सार्वजनिक बांधकाम विभाग ठाणे मंडल के अधीक्षक इंजीनियर सिद्धार्थ तांबे से मार्गदर्शन और राय मांगी गई है। ऊपर के दफ्तर से राय मिलते ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अपने काम का पैसा सीधे किसी और कंपनी के खाते में जाने की बात पता चलते ही संबंधित सुशिक्षित बेरोजगार ठेकेदारों ने उस वक्त के मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी बात रखी। विक्रमगड के भाजपा विधायक हरिश्चंद्र भोये ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से एसआईटी के जरिए जांच कराने की मांग की। इस शिकायत के बाद पालघर के सहायक पुलिस निरीक्षक मल्हार थोरात की प्रारंभिक जांच में यह सीधा-सीधा सरकारी पैसे का घपला साबित हुआ। पुलिस का शिकंजा कसते ही और FIR के आदेश निकलते ही संबंधित लोगों के हाथ-पांव फूल गए। मामले को दबाने के लिए सितंबर के पहले हफ्ते में ही यह पूरी रकम चुपचाप वापस सरकारी खाते में जमा कर दी गई।