मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:31 IST

नायलॉन मांजे पर बॉम्बे हाईकोर्ट नाराज, सरकार से सोमवार तक मांगी ठोस रिपोर्ट

नागपुर खंडपीठ ने प्रतिबंध के बावजूद बाजार में मांजे की बिक्री पर सरकार से जवाब मांगा है।

नायलॉन मांजे पर बॉम्बे हाईकोर्ट नाराज, सरकार से सोमवार तक मांगी ठोस रिपोर्ट
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

जानलेवा नायलॉन मांजे की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने में प्रशासन नाकाम रहा है, इस शिकायत पर बंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने राज्य सरकार के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। कोर्ट ने कहा कि नायलॉन मांजे के नियंत्रण और प्रतिबंध को लेकर सरकार की तरफ से जो जानकारी पेश की गई, वह अस्पष्ट थी, और इस पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट व ठोस जानकारी पेश करने को कहा है। सरकार को अगले सोमवार तक विस्तृत रिपोर्ट अदालत में देनी होगी।

नायलॉन मांजे का इस्तेमाल बढ़ने से सिर्फ लोगों को ही नहीं, बल्कि पक्षियों और दूसरे जीव-जंतुओं को भी खतरा बढ़ गया है। प्रतिबंध के बावजूद यह बाजार में आसानी से मिल जाता है और पतंगबाजी में इसका इस्तेमाल होने की शिकायतें लगातार आती रहती हैं। इसी वजह से कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया है।

सुनवाई न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति रजनीश व्यास की बेंच के सामने हुई। न्यायमित्र एड. निश्चय जाधव ने कोर्ट का ध्यान नायलॉन मांजे से होने वाले हादसों की तरफ खींचा। उन्होंने बताया कि पिछले साल विदर्भ में नायलॉन मांजे की वजह से बड़ी तादाद में लोग घायल हुए थे। दोपहिया चलाने वाले, राहगीर और दूसरे नागरिक भी मांजे की चपेट में आकर बुरी तरह जख्मी होते रहे हैं।

राज्य के पर्यावरण विभाग ने नायलॉन मांजे के उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक के लिए 1 मार्च 2023 को नोटिफिकेशन निकाला था। इसके बाद भी प्रतिबंधित मांजा बाजार तक पहुंचता रहा है और चोरी-छिपे उसकी बिक्री होने की शिकायतें आती रही हैं। कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि प्रतिबंध के बावजूद मांजा आखिर बाजार तक पहुंच कैसे रहा है और जिम्मेदार विभाग इस पर किस स्तर पर कार्रवाई कर रहे हैं। इससे पहले भी कोर्ट प्रशासन को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दे चुका है, लेकिन हालात में खास बदलाव न दिखने पर अब सरकार से जवाब मांगा गया है।

सुनवाई में यह भी सामने आया कि नोटिफिकेशन जारी होने के बावजूद प्रतिबंध जमीन पर कितना असरदार है, यह साफ नहीं है। प्रतिबंध तोड़ने पर कितनी कार्रवाई हुई, कितने केस दर्ज हुए, कितना मांजा जब्त किया गया और बिक्री रोकने के लिए प्रशासन ने क्या ठोस कदम उठाए, इन सारे सवालों पर सरकार से जवाब चाहिए। नायलॉन मांजा आम धागे से ज्यादा मजबूत होने की वजह से हादसों में गंभीर चोट पहुंचा सकता है। खासकर दोपहिया चलाने वालों के लिए सड़क पर फैला मांजा जानलेवा साबित हो सकता है। इसके अलावा पेड़ों और बिजली के तारों में फंसकर पक्षी भी घायल होते रहते हैं।

हाईकोर्ट ने सरकार को कह दिया है कि अब सामान्य या अस्पष्ट जानकारी नहीं चलेगी, ठोस और तथ्यात्मक जानकारी के साथ पक्ष रखना होगा। अगले सोमवार की सुनवाई में सरकार को नायलॉन मांजे की बिक्री और इस्तेमाल रोकने के लिए अब तक उठाए गए कदमों और कार्रवाई का पूरा ब्यौरा कोर्ट के सामने रखना होगा। कोर्ट के इस सख्त रुख के बाद अब सबकी नजर इस पर है कि प्रशासन आगे क्या कार्रवाई करता है और अगली सुनवाई में सरकार प्रतिबंध को जमीन पर लागू करने को लेकर क्या जानकारी पेश करती है।

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