नवोदय बैंक घोटाला: हिंगल की 3 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने की मांग हाई कोर्ट ने ठुकराई
नागपुर के नवोदय बैंक घोटाले में आरोपी मनमोहन हिंगल को बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच से झटका लगा है।
नागपुर के चर्चित नवोदय बैंक घोटाले में आरोपी मनमोहन हिंगल को बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच से एक और झटका लगा है। हिंगल पर आरोप है कि उन्होंने बैंक प्रबंधन के साथ मिलीभगत करके गैरकानूनी तरीके से फर्जी लोन हासिल किया था। इसी मामले में उन्हें आरोपी बनाया गया था।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने हिंगल की उम्र को देखते हुए और 3 करोड़ रुपये बतौर गारंटी जमा करने की शर्त पर उन्हें जमानत दी थी। अब हिंगल की ओर से एक अर्जी दाखिल कर यह रकम नवोदय अर्बन कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड में ट्रांसफर करने की मांग की गई। लेकिन जज नेरलीकर ने इस मांग को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि यह रकम जिस मकसद से जमा करवाई गई थी, अगर उसे अब बैंक में ट्रांसफर करने की इजाजत दी गई तो कोर्ट के मूल आदेश का पूरा मकसद ही खत्म हो जाएगा। सुनवाई में हिंगल की तरफ से वकील नितिन जायसवाल और राज्य सरकार की तरफ से अतिरिक्त सरकारी वकील एन.बी. जवादे ने अपना पक्ष रखा।
दरअसल यह पूरा मामला 2019 का है, जब जमानत के लिए यह रकम जमा करनी पड़ी थी। याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में यह मौजूदा अर्जी दाखिल करके स्पेशल कोर्ट में जमा 3 करोड़ रुपये की रकम नवोदय अर्बन कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, नागपुर को ट्रांसफर करने का निर्देश देने की मांग की थी।
याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट का ध्यान 13 दिसंबर 2019 के उस पुराने आदेश की तरफ दिलाया, जिसमें इसी शर्त पर जमानत दी गई थी। उस आदेश के मुताबिक आवेदकों को पहले 1 करोड़ रुपये 7 दिनों के अंदर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश और महाराष्ट्र जमाकर्ताओं के हित संरक्षण अधिनियम के तहत बनी स्पेशल कोर्ट में जमा करने को कहा गया था। इसके बाद बचे हुए 2 करोड़ रुपये 16 हफ्तों के अंदर स्पेशल कोर्ट में जमा करने का निर्देश दिया गया था। इस तरह कुल मिलाकर 3 करोड़ रुपये जमा किए जाने थे।
बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच के इस पुराने आदेश में यह भी साफ कर दिया गया था कि अगर तय समय में 2 करोड़ रुपये जमा नहीं किए गए तो याचिकाकर्ताओं को दी गई जमानत रद्द मानी जाएगी और स्पेशल कोर्ट उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी कर सकती है।
याचिकाकर्ता की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि 2019 के आदेश का पालन करते हुए पूरे 3 करोड़ रुपये स्पेशल कोर्ट में जमा करवा दिए गए हैं। लेकिन आवेदक बैंक के साथ वन टाइम सेटलमेंट यानी OTS स्कीम के तहत अपना खाता निपटाना चाहता था। इसी वजह से जमा की गई रकम को नवोदय अर्बन कोऑपरेटिव बैंक में ट्रांसफर करने की इजाजत मांगी गई थी, जिसे कोर्ट ने ठुकरा दिया।