मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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16:39 IST

नौसेना की युद्धपोतों के लिए ब्रह्मोस लॉन्चर और फायर कंट्रोल सिस्टम का 661.50 करोड़ का करार

रक्षा मंत्रालय ने ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड से ब्रह्मोस के फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर खरीदने का करार किया है।

नौसेना की युद्धपोतों के लिए ब्रह्मोस लॉन्चर और फायर कंट्रोल सिस्टम का 661.50 करोड़ का करार
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को ब्रह्मोस के फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर खरीदने के लिए एक बड़ा करार किया। यह करार ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के साथ 661.50 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है। इसे भारतीय नौदला की समुद्री मारक क्षमता और मजबूत करने की दिशा में रक्षा मंत्रालय का अहम कदम माना जा रहा है।

रक्षा मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक यह करार 'भारतीय खरीद, भारतीय तरीके से डिजाइन, विकसित और निर्मित' श्रेणी के तहत किया गया है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में करार पर दस्तखत हुए।

इस प्रोजेक्ट के तहत नौसेना के आगे की कतार के युद्धपोतों पर तैनात ब्रह्मोस प्रणाली की क्षमता और बढ़ाने पर जोर रहेगा। प्रोजेक्ट की खासियत यह है कि इसमें कम से कम 68 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री इस्तेमाल होगी। इससे देश में रक्षा उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय उद्योगों की हिस्सेदारी भी बढ़ेगी।

इस प्रोजेक्ट में कई सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) के शामिल होने की उम्मीद है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की तरफ यह कदम अहम है। उन्नत सैन्य तकनीक से जुड़े उपकरण बनाने में देश के उद्योगों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

मंत्रालय के मुताबिक इस प्रोजेक्ट से अगले तीन साल में रोजगार के मौके भी बनेंगे। ब्रह्मोस प्रणाली भारतीय नौसेना की मुख्य सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों में से एक है और कई अगली कतार के युद्धपोतों पर तैनात है। बहुत तेज रफ्तार और सटीक निशाना लगाने की क्षमता इसकी खास बातें हैं। यह प्रणाली लंबी दूरी से समुद्र के साथ-साथ जमीन के निशानों को भी भेद सकती है।

नए फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर की खरीद से नौसेना के युद्धपोतों की हमला करने की ताकत और मजबूत होने की उम्मीद है। हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा मजबूत करने के साथ भारत स्वदेशी रक्षा तकनीक पर लगातार जोर दे रहा है। इसलिए 661.50 करोड़ रुपये का यह करार सिर्फ उपकरणों की खरीद नहीं है। यह समुद्री सुरक्षा, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और नौसेना की आगे की युद्ध क्षमता को मजबूत करने के लिहाज से अहम कदम है।

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