मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:20 IST

नांदेड में आदिवासी विकास प्रकल्प का 17 करोड़ का घोटाला, 280 चेक बिना मंजूरी भुनाए गए

किनवट के एकात्मिक आदिवासी विकास प्रकल्प कार्यालय में करोड़ों के सरकारी फंड की हेराफेरी सामने आई, एक क्लर्क पर केस दर्ज लेकिन सवाल बड़े अफसरों पर भी उठ रहे हैं

नांदेड में आदिवासी विकास प्रकल्प का 17 करोड़ का घोटाला, 280 चेक बिना मंजूरी भुनाए गए
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नांदेड जिले के किनवट स्थित एकात्मिक आदिवासी विकास प्रकल्प कार्यालय में सरकारी पैसे का एक बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। जांच में सामने आया है कि यहां से 16 करोड़ 37 लाख 66 हजार 912 रुपए की सरकारी रकम गबन कर ली गई। आरोप है कि आदिवासियों के विकास के लिए आए इस फंड पर दफ्तर के अफसरों और स्टाफ ने मिलकर हाथ साफ किया। इस मामले में कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक भगवान उद्धवराव डवरे के खिलाफ पुलिस केस दर्ज किया गया है, लेकिन लोगों का कहना है कि सिर्फ एक कर्मचारी के दम पर इतना बड़ा घोटाला अंजाम देना मुमकिन ही नहीं है।

पुलिस जांच के मुताबिक यह पूरा खेल 1 अप्रैल 2024 से 16 सितंबर 2026 के बीच, यानी करीब ढाई साल के दौरान चला। आरोप है कि सरकारी फंड, बैंक खातों और चेक की रजिस्टर एंट्री में हेरफेर करके बिना किसी अधिकारिक मंजूरी के कुल 280 चेक भुना लिए गए। जांच में यह भी सामने आया कि यह पैसा सरकारी कामों में खर्च होने के बजाय पढ़े-लिखे बेरोजगार युवकों, नाबालिग बच्चों, मजदूरों, दुकानदारों और दूसरे प्राइवेट लोगों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। इनमें से करीब 57 लोगों के नाम पर तकरीबन 13 करोड़ रुपए निकाले गए। आरोप है कि सेंट्रल रिजर्व फंड का पैसा वापस नहीं जाता, इस बात का फायदा उठाते हुए कुछ चेकों पर असली दस्तखत लिए गए तो बाकी चेकों पर अफसरों के फर्जी दस्तखत करके यह पूरा खेल खेला गया।

तीन साल के इस दौर में मेघना कावली, जिनीत दोनतुला और बी. सर्वरण नाम के तीन IAS अफसर किनवट में प्रकल्प अधिकारी रह चुके हैं। सवाल यह है कि किसी भी बड़े चेक को भुनाने के लिए कम से कम तीन-चार जिम्मेदार अफसरों के दस्तखत जरूरी होते हैं, बैंक खाते और दस्तखत की बारीकी से जांच की जाती है, फिर भी तीन साल तक ये 280 चेक बिना पकड़े कैसे पास होते रहे। इस बीच दो बार सरकारी ऑडिट भी हुआ, तो 17 करोड़ की यह गड़बड़ी ऑडिटरों की नजर से कैसे बच गई, यह सवाल स्थानीय लोग और आदिवासी संगठन उठा रहे हैं। बैंक अफसरों की मिलीभगत के बिना यह लेनदेन मुमकिन नहीं माना जा रहा, ऐसे में सिर्फ एक लिपिक पर केस दर्ज कर बड़े अफसरों को बचाने की कोशिश हो रही है, ऐसी शंका भी जताई जा रही है।

जुलाई 2026 में पदभार संभालने वाले प्रकल्प अधिकारी तथा उपविभागीय दंडाधिकारी बी. सर्वरण IAS ने जब कार्यालय के मुख्य खाते की जांच की, तब ये संदिग्ध लेनदेन सामने आए। इसके बाद जिलाधिकारी राहुल कर्डिले की निगरानी में प्रकल्प कार्यालय के अफसर प्रेमसिंग बाबुसिंग आडे की शिकायत पर पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कराया गया। मामले में मीडिया ने प्रकल्प अधिकारी बी. सर्वरण से सवाल पूछे तो उन्होंने जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि यह मामला गोपनीय है, आप दफ्तर से बाहर जाइए। फिलहाल इस मामले की आगे की जांच पुलिस इंस्पेक्टर जगदीश मंडलवार कर रहे हैं और सभी 280 ट्रांजेक्शन की कड़ी-दर-कड़ी छानबीन जारी है। इस घोटाले का दायरा और बढ़ने की आशंका है, और बड़े अफसर पुलिस के शिकंजे में कब आते हैं, इस पर पूरे नांदेड और महाराष्ट्र की नजर टिकी है।

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